भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : घर में शंख रखना शुभ माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके वास्तु नियमों की अनदेखी करने से सुख-शांति छिन सकती है?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, शंख रखने के कुछ खास नियम हैं, जिन्हें न मानने पर शुभ फल की जगह अशुभ परिणाम भी मिल सकते हैं।
सनातन धर्म में शंख का विशेष महत्व बताया गया है। पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में शंख की ध्वनि को बेहद पवित्र माना जाता है।कहा जाता है कि शंख की उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान हुई थी और यह भगवान विष्णु का प्रिय वाद्य यंत्र है। इसी कारण विष्णु और लक्ष्मी जी की पूजा में शंख का स्थान खास होता है।
शंख रखने की सही दिशा:शंख की सफाई और पवित्रता:
शंख को हमेशा साफ रखें। हर बार बजाने के बाद उसे साफ पानी से धोकर रखें।
गंदे या धूल भरे स्थान पर शंख रखना अशुभ होता है, जिससे घर में नकारात्मक ऊर्जा फैलती है।
शंख को जमीन पर न रखें:
वास्तु के अनुसार, शंख को कभी भी जमीन पर नहीं रखना चाहिए। पूजा के दौरान इसे साफ कपड़े या छोटे स्टैंड पर रखना शुभ माना जाता है।
शंख रखने का सही तरीका:
शंख को हमेशा भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी या बाल गोपाल की मूर्ति के दाहिनी ओर रखें।
शंख का खुला भाग हमेशा ऊपर की ओर होना चाहिए।
दो शंख रखना होता है शुभ:
घर में दो शंख रखना शुभ माना गया है — एक पूजा के लिए और दूसरा बजाने के लिए।
पूजा वाला शंख सिर्फ पूजन में उपयोग करें और बजाने वाला अलग रखें।
पूजा वाला शंख कभी न बजाएं:
जो शंख पूजा के लिए रखा गया हो, उसे बजाना वर्जित है। ऐसा करने से पूजन का प्रभाव कम हो जाता है।
शिव पूजा में शंख का उपयोग न करें:
मान्यता है कि भगवान शिव ने शंखचूर्ण राक्षस का वध किया था, इसलिए उनकी पूजा में शंख का प्रयोग वर्जित है। शिवलिंग पर शंख से जल चढ़ाना भी अशुभ माना गया है।
शंख को खाली न रखें:
पूजा के बाद शंख को कभी खाली न छोड़ें। यदि कुछ न रखें तो उसमें जल भर दें।इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और वातावरण पवित्र बना रहता है।
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