भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : जरूरत की खबर – बोरवेल से आ रहा है गंदा पानी, सेहत के लिए खतरा बन सकता है!
आजकल ज्यादातर घरों में बोरवेल का पानी ही पीने के काम आता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये पानी सच में पीने लायक है या नहीं? दरअसल, बोरवेल का पानी हमेशा साफ नहीं होता। इसमें आर्सेनिक, लेड, आयरन जैसे हैवी मेटल्स, हाई TDS, हार्ड सॉल्ट्स और बैक्टीरिया मौजूद हो सकते हैं, जो धीरे-धीरे शरीर के लिए जहर बन जाते हैंवर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के मुताबिक, साल 2022 में दूषित पानी और खराब हाइजीन से दुनिया भर में 14 लाख से ज्यादा लोगों की जान गई थी। इनमें ज्यादातर लोग मिडिल या लो-इनकम देशों से थे। डायरिया, हैजा और टाइफाइड जैसी बीमारियां अब भी गंदे पानी की सबसे बड़ी देन हैं।
श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के डॉक्टर अरविंद अग्रवाल कहते हैं कि बोरवेल का पानी भूमिगत सतहों से गुजरता है, इसलिए इसमें हाई TDS, मेटल्स और बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं। WHO के अनुसार, अगर पानी में TDS 300 ppm से ज्यादा है, तो वह शरीर के लिए नुकसानदायक है। जबकि BIS ने भी 500 ppm से ऊपर के पानी को असुरक्षित माना है।
अशुद्ध पानी पीने से बढ़ते हैं ये 5 बड़े खतरे
हाई TDS (टोटल डिसॉल्व्ड सॉलिड्स)
– किडनी स्टोन का खतरा बढ़ता है।
– पेट की पाचन समस्या और गैस की दिक्कतें होती हैं।
– शरीर में थकान और कमजोरी आती है।
हैवी मेटल्स (भारी धातुएँ)
– बच्चों की ग्रोथ पर बुरा असर।
– लंबे समय में कैंसर का खतरा।
– दिमाग़ की नसों को नुकसान।
हाई सॉल्ट्स (अधिक लवण)
– ब्लड प्रेशर बढ़ता है।
– स्किन ड्राई और बेजान हो जाती है।
– बाल झड़ने लगते हैं।
बैक्टीरिया संक्रमण
– डायरिया और पेट के इंफेक्शन बढ़ते हैं।
फ्लोराइड
– दांत और हड्डियाँ कमजोर होती हैं।
– जोड़ों में दर्द की समस्या होती है।
पानी की क्वालिटी कैसे पहचानें?
कानपुर के वाटर एक्सपर्ट सागर गौड़ बताते हैं कि सिर्फ ₹250-500 के TDS मीटर से घर पर ही पानी की क्वालिटी चेक की जा सकती है। अगर रीडिंग 500 ppm से ज्यादा आती है, तो ये पानी पीने के लिए सुरक्षित नहीं है। इसके साथ माइक्रोबियल टेस्ट भी कराना जरूरी है।
बोरवेल के गंदे पानी को घर पर साफ करने के 7 आसान तरीके
उबालकर पानी पीएं
कम से कम 10 मिनट तक पानी को उबालें। इससे बैक्टीरिया और वायरस खत्म हो जाते हैं।
ब्लीच मिलाएं
1 गैलन पानी में 8 बूंद बिना खुशबू वाली ब्लीच डालें, 30 मिनट बाद इस्तेमाल करें।
धूप में रखकर शुद्ध करें
पानी को 5–6 घंटे धूप में रखें। सूरज की किरणें पानी को नैचुरल तरीके से शुद्ध कर देती हैं।
मल्टी-लेयर फिल्टर लगाएं
रेत, कंकड़ और चारकोल की परतों वाला फिल्टर बनाएं। इससे मिट्टी, जंग और गंध हटती है।
फिटकरी डालें
पानी में फिटकरी घुमाकर 2–3 घंटे रखें। गंदगी नीचे बैठ जाएगी और ऊपर का पानी साफ रहेगा।
मोरिंगा (सहजन) पाउडर मिलाएं
एक चम्मच पाउडर पानी में डालें। ये नेचुरल कोएगुलेंट की तरह काम करता है।
पोटेशियम परमैंगनेट डालें
पानी में इसकी एक गोली डालें। यह बैक्टीरिया को खत्म करता है, लेकिन पीने से पहले उबालना जरूरी है।
RO सिस्टम क्यों ज़रूरी है?
RO मशीन 95–99% तक अशुद्धियाँ निकाल देती है। इससे पानी का TDS 50–150 ppm तक हो जाता है जो पीने के लिए सुरक्षित है। एक्सपर्ट्स की मानें तो RO में मिनरल कार्ट्रिज लगवाना चाहिए ताकि पानी में ज़रूरी मिनरल्स वापस जुड़ जाएं।
RO की नियमित देखभाल बेहद ज़रूरी
– पानी का फ्लो और TDS समय-समय पर जांचते रहें।
– फिल्टर चोक हो तो तुरंत बदलें।
– हर महीने टैंक की सफाई करें।
– मशीन से आवाज़ आने पर सर्विस कराएं।
– कनेक्शन टाइट रखें ताकि लीक न हो।
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