झीरम कांड का ‘खूंखार मास्टरमाइंड’ चैतू सरेंडर: महेंद्र कर्मा पर 100 गोलियां चलाने वाला नक्सली आखिरकार झुका..


भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : बस्तर के दिल दहला देने वाले झीरम घाटी नरसंहार का खूंखार मास्टरमाइंड चैतू उर्फ श्याम दादा आखिरकार पुलिस के सामने झुक गया। वह वही नक्सली है, जिस पर 29 से ज्यादा कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या का आरोप है। स्थानीय लोग इसे बस्तर के सबसे डरावने चेहरों में से एक मानते रहे हैं।

Jhiram Ghaati Mastermind Arrested Look

मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जगदलपुर में चैतू ने सरेंडर किया। यह वही शख्स है जिसने 2013 के झीरम घाटी हमले में कांग्रेस के टॉप लीडर्स को मौत के घाट उतारने की साजिश रची थी। इस हमले में कुल 32 लोग मारे गए थे।
बस्तर टाइगर कहे जाने वाले महेंद्र कर्मा को 100 गोलियां मारी गईं थीं और नक्सलियों ने उनके सीने पर चढ़कर नाच तक किया था—एक ऐसी क्रूरता, जिसे बस्तर आज तक नहीं भूला।

चैतू पर 25 लाख रुपए का इनाम था। DKSZCM कैडर का सदस्य रहा यह नक्सली पिछले 45 साल से संगठन में सक्रिय था, जिनमें से 35 साल उसने बस्तर के घने जंगलों में बिताए। कई बार सुरक्षाबलों की गोलीबारी से बाल-बाल बचा। लेकिन लगातार फोर्स की मौजूदगी और दबाव के बाद उसने हथियार डालने का फैसला किया।

बस्तर IG सुंदरराज पी के मुताबिक, चैतू और अन्य सरेंडर किए नक्सलियों पर कुल 65 लाख रुपए का इनाम घोषित था। पुलिस अब पोलित ब्यूरो सदस्य देवजी, केंद्रीय समिति सदस्य रामदर, DKSZC सदस्य पापाराव, देवा (बार्से देवा) समेत कई बड़े नक्सल नेताओं की तलाश में है।

चैतू ने कहा – नक्सल संगठन में अब कुछ नहीं रखा

सरेंडर के बाद चैतू ने खुलकर कहा—
“रूपेश और सोनू दादा भी रास्ता छोड़ चुके हैं। मेरी उम्र 63 साल है। अब नक्सल संगठन में कुछ नहीं बचा। हालात बदले हैं, इसलिए हमने हिंसा छोड़ने का फैसला किया और पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया।”

स्थानीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चैतू झीरम हमले का सबसे बड़ा मास्टरमाइंड था। 25 मई 2013 को दरभा घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हमला कराने में इसका ही हाथ था।
महेंद्र कर्मा सहित कई नेताओं और जवानों ने उस हमले में शहादत दी थी। 

अब जानिए झीरम घाटी हमले की पृष्ठभूमि

यह हमला 2013 विधानसभा चुनावों से ठीक पहले हुआ था। उस समय छत्तीसगढ़ में रमन सिंह की सरकार थी और कांग्रेस 10 साल से विपक्ष में बैठकर सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही थी। इसी अभियान के तहत पार्टी ने पूरे राज्य में परिवर्तन यात्रा निकाली।

25 मई 2013 को सुकमा में परिवर्तन रैली के बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला जगदलपुर लौट रहा था। करीब 25 गाड़ियों में 200 नेता और कार्यकर्ता साथ चल रहे थे।
काफिले की सबसे आगे की गाड़ी में उस समय प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और कवासी लखमा मौजूद थे।

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