भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : भिलाई से आई एक बड़ी खबर ने सबको चौंका दिया है। जिस इंजीनियर को अफसर की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था, वही अब बाइज्जत बरी हो गया है। करीब 8 महीने जेल में रहने के बाद कोर्ट ने साफ कहा—यह हत्या नहीं, बल्कि एक हादसा था।
भिलाई की एक निजी सीमेंट फैक्ट्री में कोल हैंडलिंग प्लांट के HOD आर. बालाराजू की खून से लथपथ लाश मिलने के बाद पुलिस ने CHP इंचार्ज और मैकेनिकल इंजीनियर संजय तिवारी को गिरफ्तार किया था। पुलिस का दावा था कि दोनों के बीच विवाद हुआ था और संजय की शर्ट पर खून के छींटे मिले हैं। इसी आधार पर उन्हें आरोपी बना दिया गया।
लेकिन अदालत में सच्चाई कुछ और निकली। करीब 255 दिन जेल में रहने के बाद कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष हत्या से जुड़े कोई ठोस सबूत नहीं दे सका। डॉक्टर की रिपोर्ट से यह स्पष्ट हुआ कि मौत सिर में चोट और अधिक खून बहने से हुई, जो ऊंचाई से गिरने पर भी संभव थी।
पुलिस ने घटना स्थल से खून, मिट्टी और फाइबर पाइप जब्त किए थे। पर जांच में हेलमेट क्षतिग्रस्त नहीं मिला, जबकि अगर किसी को सिर पर चोट लगी होती तो हेलमेट टूटना स्वाभाविक था। इतना ही नहीं, शर्ट और हथौड़े पर भी खून के निशान नहीं पाए गए।
विवेचना के दौरान खुद तत्कालीन थाना प्रभारी ने स्वीकार किया कि शुरुआती जानकारी में सभी ने बताया था कि आर. बालाराजू की मौत गिरने से हुई है। डॉक्टर ने भी माना कि ऊबड़-खाबड़ जगह पर गिरने से ऐसी चोटें आ सकती हैं।
संजय तिवारी ने भी अदालत में अपने पक्ष में कॉल डिटेल्स और डिजिटल साक्ष्य पेश किए। जांच में सामने आया कि हादसे के वक्त वे किसी और से बात कर रहे थे। बालाराजू रात 9:26 बजे तक फोन पर थे और 9:30 बजे चक्कर खाकर गिर गए। कर्मचारियों ने 9:46 बजे तक उन्हें अस्पताल पहुंचाया। वहीं, संजय 9:47 बजे घटनास्थल पर पहुंचे थे।
इन डिजिटल साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर कोर्ट ने संजय तिवारी को निर्दोष करार दे दिया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी यह साफ हुआ कि आर. बालाराजू की मौत हार्ट अटैक और खून बहने से हुई थी, न कि किसी हमले से।
यह भी सामने आया कि इस मामले में कंपनी या परिजनों ने FIR दर्ज नहीं कराई थी, बल्कि पुलिस ने खुद मुखबिर की सूचना पर हत्या का केस दर्ज कर संजय को गिरफ्तार किया था। FIR में उनका नाम तक नहीं था, केवल शंका के आधार पर गिरफ्तारी हुई।
बरी होने के बाद संजय तिवारी ने कहा, “मेरे साथ बहुत अन्याय हुआ। मुझे सुना तक नहीं गया। अदालत ने साबित कर दिया कि मैं निर्दोष हूं। यह हत्या नहीं बल्कि एक हादसा था। लेकिन इन 8 महीनों में सबकुछ बदल गया—पत्नी ने साथ छोड़ दिया, समाज ने ठुकरा दिया और नौकरी भी चली गई।”
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