भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : नमक हर रसोई का ज़रूरी हिस्सा है। इसके बिना भोजन का स्वाद अधूरा लगता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नमक जितना ज़रूरी है, उतना ही इसका संतुलन भी अहम है? ज्यादा या कम नमक — दोनों ही सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं।
हमारे घरों में आमतौर पर आयोडीन युक्त सफेद नमक का इस्तेमाल होता है। वहीं, कुछ लोग सेंधा नमक या काला नमक का भी उपयोग करते हैं। इनमें सेंधा नमक को प्राकृतिक और सेहतमंद माना जाता है। यह वही नमक है जो व्रत के दौरान आमतौर पर खाया जाता है।
डाइटीशियन डॉ. पूनम तिवारी (डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ) बताती हैं कि सेंधा नमक एक प्राकृतिक, अनप्रोसेस्ड नमक है, जो शरीर के इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखता है और पाचन को सुधारता है।
नमक की प्रमुख तीन किस्में
सफेद नमक (टेबल सॉल्ट): इसमें आयोडीन होता है, लेकिन मिनरल्स बहुत कम।
सेंधा नमक (रॉक सॉल्ट): पहाड़ी चट्टानों से प्राप्त, इसमें आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स भरपूर पाए जाते हैं।
काला नमक: इसका स्वाद और गंध अलग होती है। इसमें मौजूद सल्फर कंपाउंड्स पाचन सुधारने और गैस कम करने में मदद करते हैं।
सेंधा नमक के पोषक तत्व
सेंधा नमक में करीब 85% सोडियम क्लोराइड होता है और बाकी 15% में 84 तरह के मिनरल्स पाए जाते हैं — जैसे आयरन, कॉपर, जिंक, मैग्नीशियम, सेलेनियम आदि। वहीं सफेद नमक में लगभग 97% सोडियम क्लोराइड और 3% अन्य रासायनिक तत्व होते हैं।
सेंधा नमक कहां से आता है
यह हिमालय की चट्टानों और पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सॉल्ट रेंज (नमक कोह) से प्राप्त होता है। यहां स्थित खेवड़ा नमक खान दुनिया की सबसे बड़ी नमक खानों में गिनी जाती है।
सेंधा नमक के फायदे
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यह शरीर के पोषक तत्वों को पचाने में मदद करता है, पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है और सर्दी-जुकाम या गले की खराश में भी राहत देता है।
यह शरीर के पोषक तत्वों को पचाने में मदद करता है, पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है और सर्दी-जुकाम या गले की खराश में भी राहत देता है।
किन लोगों को सावधान रहना चाहिए
डॉ. तिवारी बताती हैं कि ज्यादा सेंधा नमक खाने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, किडनी पर असर पड़ सकता है और शरीर में सूजन (वॉटर रिटेंशन) हो सकती है।
थायरॉइड मरीजों के लिए भी यह ठीक नहीं है क्योंकि इसमें आयोडीन की कमी होती है।
डॉ. तिवारी बताती हैं कि ज्यादा सेंधा नमक खाने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, किडनी पर असर पड़ सकता है और शरीर में सूजन (वॉटर रिटेंशन) हो सकती है।
थायरॉइड मरीजों के लिए भी यह ठीक नहीं है क्योंकि इसमें आयोडीन की कमी होती है।
रोजाना कितना नमक खाएं
WHO के अनुसार, एक व्यक्ति को दिनभर में 5 ग्राम (1 छोटा चम्मच) से ज्यादा नमक नहीं खाना चाहिए। रिपोर्ट बताती है कि भारत में औसतन लोग 10 ग्राम तक नमक खा रहे हैं — यानी जरूरत से दोगुना!
WHO के अनुसार, एक व्यक्ति को दिनभर में 5 ग्राम (1 छोटा चम्मच) से ज्यादा नमक नहीं खाना चाहिए। रिपोर्ट बताती है कि भारत में औसतन लोग 10 ग्राम तक नमक खा रहे हैं — यानी जरूरत से दोगुना!
क्या सेंधा नमक रोज खा सकते हैं?
सेंधा नमक भले ही प्राकृतिक हो, लेकिन इसे रोजाना नहीं खाना चाहिए। डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह से सीमित मात्रा में लें।
सेंधा नमक भले ही प्राकृतिक हो, लेकिन इसे रोजाना नहीं खाना चाहिए। डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह से सीमित मात्रा में लें।
सफेद बनाम सेंधा नमक
सफेद नमक में आयोडीन होता है जो मेटाबॉलिज्म और ग्रोथ के लिए ज़रूरी है, जबकि सेंधा नमक में यह तत्व नहीं होता। इसलिए सफेद नमक को पूरी तरह बदलना सही नहीं — इसे कभी-कभी इस्तेमाल करना बेहतर है।
अगर आप हेल्थ कॉन्शस हैं, तो अपने नमक की मात्रा जरूर जांचिए। याद रखिए — नमक का स्वाद तभी अच्छा है, जब संतुलन बरकरार हो।
सेंधा नमक के 8 फायदे
पाचन सुधारता है।
गले की खराश में राहत देता है।
सर्दी-खांसी में फायदेमंद है।
स्किन को हेल्दी रखता है।
मसल्स पेन में राहत देता है।
ब्लड प्रेशर संतुलित रखता है।
हड्डियों को मजबूत बनाता है।
मेटाबॉलिज्म दुरुस्त रखता है।
सेंधा नमक और सफेद नमक में अंतर
रॉक सॉल्ट (सेंधा नमक)
केमिकल प्रोसेस्ड नहीं होता।
आयोडीन नहीं होता।
कोई एडिटिव्स नहीं मिलाए जाते।
मिनरल्स नैचुरल बने रहते हैं।
नैचुरल माइक्रोन्यूट्रिएंट्स होते हैं।
सोडियम कम होता है।
केमिकल प्रोसेस्ड नहीं होता।
आयोडीन नहीं होता।
कोई एडिटिव्स नहीं मिलाए जाते।
मिनरल्स नैचुरल बने रहते हैं।
नैचुरल माइक्रोन्यूट्रिएंट्स होते हैं।
सोडियम कम होता है।
रेगुलर टेबल सॉल्ट (सफेद नमक)
केमिकल प्रोसेस्ड होता है।
आयोडीन मिलाया जाता है।
जमने से रोकने के लिए एडिटिव्स मिलाते हैं।
रिफाइनिंग से मिनरल्स कम हो जाते हैं।
नैचुरल माइक्रोन्यूट्रिएंट्स नहीं होते।
सोडियम ज़्यादा होता है।
किन लोगों को सेंधा नमक कम खाना चाहिए
हाई ब्लड प्रेशर के मरीज़
हार्ट डिजीज़ के मरीज़
किडनी के मरीज़
थायरॉइड के मरीज़
जिन्हें डाइजेस्टिव इश्यू है
गर्भवती महिलाएं
छोटे बच्चे
बुजुर्ग
Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से साझा की गई है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय लेने से पहले अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।
हाई ब्लड प्रेशर के मरीज़
हार्ट डिजीज़ के मरीज़
किडनी के मरीज़
थायरॉइड के मरीज़
जिन्हें डाइजेस्टिव इश्यू है
गर्भवती महिलाएं
छोटे बच्चे
बुजुर्ग
Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य जन-जागरूकता के उद्देश्य से साझा की गई है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय लेने से पहले अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।
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