Delhi Blast: क्या अब पढ़े-लिखे वर्ग में पनप रहा नया आतंकवाद!अमोनियम नाइट्रेट से लेकर 5 डॉक्टरों की साजिश तक… कैसे ‘डी गैंग’ ने दिल्ली को दहला दिया!


भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : दिल्ली में हुए भीषण ब्लास्ट ने पूरे देश को झकझोर दिया है। लाल किले के पास हुए इस धमाके में 12 लोगों की मौत ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जांच में सामने आया है कि इस वारदात के पीछे कोई आम अपराधी नहीं, बल्कि 5 डॉक्टरों का गैंग था – जिसे एजेंसियां ‘डी गैंग’ के नाम से पहचान रही हैं।

ब्लास्ट में डॉक्टर उमर का नाम सबसे आगे

सूत्रों के मुताबिक, ब्लास्ट वाली कार में जो व्यक्ति मौजूद था, वह डॉक्टर उमर नबी था — जिसे इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। उमर फरीदाबाद के अल फलाह मेडिकल कॉलेज में नौकरी करता था। यहीं से इस नेटवर्क की कड़ी खुलनी शुरू हुई।

                                     

इसी यूनिवर्सिटी के डॉक्टर मुजम्मिल शकील को कुछ दिन पहले गिरफ्तार किया गया था। उसके कमरे से अमोनियम नाइट्रेट, एके-47 राइफल और बड़ी मात्रा में गोला-बारूद बरामद हुआ था।

पांच डॉक्टरों का नेटवर्क, ‘डी गैंग’ के नाम से चर्चित

इस केस में सिर्फ डॉक्टर उमर और डॉक्टर मुजम्मिल ही नहीं, बल्कि तीन और डॉक्टर – डॉ. शाहीन, डॉ. आदिल और डॉ. मोहिउद्दीन भी पुलिस के घेरे में हैं। इन पांचों को मिलाकर ‘डी गैंग’ कहा जा रहा है, जिसने मिलकर इस ब्लास्ट की साजिश रची थी।

कौन है डॉक्टर मुजम्मिल?

जम्मू-कश्मीर और फरीदाबाद पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार किए गए डॉक्टर मुजम्मिल शकील पिछले साढ़े तीन साल से अल फलाह यूनिवर्सिटी के कैंपस में रह रहा था। पुलिस को उसके ठिकाने से 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट मिला, जो आठ बड़े और चार छोटे सूटकेस में छुपाया गया था। बताया गया कि करीब 15 दिन पहले ही यह विस्फोटक सामग्री उसे पहुंचाई गई थी।

डॉ. आदिल अहमद राठर का कनेक्शन

डॉ. आदिल अहमद राठर, जो यूपी के सहारनपुर में डॉक्टर के रूप में काम करता था, उसे श्रीनगर पुलिस ने जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर लगाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। हाल ही में सहारनपुर में तनाव के बाद उसकी पहचान हुई और उसे अंबाला रोड स्थित अस्पताल से पकड़ा गया।वह अनंतनाग का रहने वाला है और हाल ही में उसने यहां की एक महिला डॉक्टर से निकाह किया था।

लखनऊ की महिला डॉक्टर भी गिरफ्त में

लखनऊ की डॉक्टर शाहीन शाहिद, जो मुजम्मिल की करीबी बताई जा रही है, उसे भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, शाहीन की गाड़ी से ही मुजम्मिल घूमता था और हथियार भी उसी गाड़ी से बरामद किए गए।

डॉ. मोहिउद्दीन का आतंकी कनेक्शन

गुजरात ATS ने अहमदाबाद में जिस आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया था, उसका मास्टरमाइंड कोई आतंकी नहीं बल्कि डॉक्टर निकला – डॉ. अहमद मोहिउद्दीन। उसने चीन से एमबीबीएस किया था और उसका संबंध इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रोविंस (ISKP) से जुड़ा पाया गया।उसके पास से चार लीटर अरंडी तेल, 30 कारतूस और कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद हुए। वह राइसिन जहर तैयार करने का प्रयोग कर रहा था।

ब्लास्ट वाली कार और मास्टरमाइंड उमर

ब्लास्ट में इस्तेमाल की गई i20 कार में डॉक्टर उमर सवार था। वह पुलवामा का रहने वाला था और डॉक्टर आदिल का करीबी था। उमर ने श्रीनगर GMC से एमडी मेडिसिन की पढ़ाई की और दिल्ली आकर अल फलाह यूनिवर्सिटी में पढ़ाने लगा।परिवार ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उमर की भाभी ने कहा — “उमर बहुत अच्छे इंसान थे, उनका इस सब से कोई लेना-देना नहीं। पुलिस उन्हें गलत फंसा रही है।”

जांच में जुटी एजेंसियां

दिल्ली पुलिस और जम्मू-कश्मीर पुलिस की टीमें अब भी जांच में जुटी हैं। ब्लास्ट में इस्तेमाल कार बदरपुर बॉर्डर से दिल्ली में दाखिल होती दिखी थी। इसलिए शक गहराया है कि कार में फरार संदिग्ध डॉक्टर उमर ही मौजूद था।अब वक्त आ गया है कि समाज, स्कूल, और यूनिवर्सिटी तक इस साजिश के खिलाफ सजग रहें।

देश में आतंक का चेहरा अब नया रूप ले चुका है।पहले जहां आतंकवाद का नाम आते ही अशिक्षित युवाओं की तस्वीरें सामने आती थीं, वहीं अब वही चेहरा सफेद कोट और प्रतिष्ठा की आड़ में छिपा दिखाई दे रहा है।
शिक्षा का इस्तेमाल अब सेवा नहीं, बल्कि साजिश के औजार के रूप में किया जा रहा है।

हाल ही में सामने आए मामलों ने पूरे देश को सोचने पर मजबूर कर दिया है।लाल किले धमाके से पहले की गई कार्रवाई ने एक चौंकाने वाला सच उजागर किया है —अब आतंक की जड़ें प्रतिष्ठित शिक्षित वर्ग में गहराने लगी हैं।
जिनकी गिरफ्तारी हुई है, उनमें अधिकतर का संबंध डॉक्टरी या शिक्षण से है।

सोमवार सुबह जम्मू-कश्मीर और फरीदाबाद पुलिस की संयुक्त टीम ने दो ठिकानों पर छापे मारकर करीब 2,900 किलो आईईडी बनाने वाला केमिकल, हथियार और गोला-बारूद जब्त किया।यह ऑपरेशन जैश-ए-मोहम्मद और अंसर गजवात-उल-हिंद से जुड़े एक बड़े आतंकी नेटवर्क के खुलासे के दौरान हुआ।यह कार्रवाई इस बात का सबूत है कि आतंक अब सीमाओं से नहीं, बल्कि समाज के भीतर से सिर उठा रहा है।

जांच में यह भी सामने आया है कि कई और डॉक्टर और शिक्षक इस नेटवर्क से जुड़े हैं।कुछ मौलवियों को भी गिरफ्तार किया गया है।इन सभी गिरफ्तारियों ने देश की सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है।आतंक अब “सफेद कोट” की आड़ में काले कारनामों को अंजाम दे रहा है।

पहले आतंक के लिए नासमझ या अशिक्षित युवाओं का ब्रेनवाश किया जाता था,लेकिन अब यह आग उस तबके में लग रही है, जो समाज को दिशा देने वाला माना जाता है।यह बदलाव सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के देशों के लिए चेतावनी है।

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