भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : कभी शिव मंदिर गए हों तो आपने देखा होगा – भक्त नंदी के कानों में कुछ न कुछ कहते जरूर हैं। यह दृश्य भक्ति और आस्था से भरा होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर नंदी के कान में मनोकामना कहने की यह परंपरा क्यों चली आ रही है?
नंदी भगवान शिव की सवारी हैं और उनके सबसे करीबी गण माने जाते हैं। लोक मान्यता है कि नंदी न सिर्फ भगवान शिव के साथी हैं, बल्कि वे उनके सच्चे संदेशवाहक भी हैं। कहा जाता है कि जहां-जहां भगवान शिव विराजमान रहते हैं, वहीं नंदी भी उनके द्वारपाल बनकर बैठते ह/
हिंदू परंपरा में माना गया है कि नंदी के कान में बोली गई बात सीधे शिवजी तक पहुंचती है। यह विश्वास भक्त और भगवान के बीच आत्मीयता और गहराई को दर्शाता है।
हालांकि, इस परंपरा का उल्लेख किसी भी प्रमुख ग्रंथ या शास्त्र में स्पष्ट रूप से नहीं मिलता। यह लोक परंपराओं और आस्था पर आधारित प्रथा मानी जाती है, जो समय के साथ भक्ति का प्रतीक बन गई।
आज भी हर सोमवार या महाशिवरात्रि पर शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ नंदी के कान में अपनी मनोकामना फूंकते हुए नजर आती है। यही भारतीय भक्ति की सुंदरता है—जहां विश्वास ही सबसे बड़ी शक्ति है।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. भिलाई की पत्रिका न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
हिंदू परंपरा में माना गया है कि नंदी के कान में बोली गई बात सीधे शिवजी तक पहुंचती है। यह विश्वास भक्त और भगवान के बीच आत्मीयता और गहराई को दर्शाता है।
हालांकि, इस परंपरा का उल्लेख किसी भी प्रमुख ग्रंथ या शास्त्र में स्पष्ट रूप से नहीं मिलता। यह लोक परंपराओं और आस्था पर आधारित प्रथा मानी जाती है, जो समय के साथ भक्ति का प्रतीक बन गई।
आज भी हर सोमवार या महाशिवरात्रि पर शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ नंदी के कान में अपनी मनोकामना फूंकते हुए नजर आती है। यही भारतीय भक्ति की सुंदरता है—जहां विश्वास ही सबसे बड़ी शक्ति है।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. भिलाई की पत्रिका न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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