भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : क्या आप भी सुबह ब्रश करने के बाद अपना टूथब्रश बाथरूम में ही छोड़ देते हैं? अगर हाँ… तो सावधान हो जाइए! आपकी यही आदत आपके ब्रश पर हजारों बैक्टीरिया जमा कर सकती है, जो बिना पता चले शरीर में पहुंचकर बीमारियां बढ़ा देते हैं।
आजकल कई लोग अपना ब्रश अटैच्ड लैट्रिन-बाथरूम में ही रखते हैं। लेकिन हालिया रिसर्च बताती है कि बाथरूम में रखा ब्रश हर फ्लश के साथ हवा में फैलने वाले टॉयलेट प्लम के सूक्ष्म कणों के संपर्क में आता है। ये कण बैक्टीरिया से भरे होते हैं और आसपास रखी चीजों पर जम जाते हैं।
जर्नल ऑफ हॉस्पिटल इन्फेक्शन (JHI) की स्टडी कहती है कि खुले टॉयलेट को फ्लश करने पर एयरोसोल क्लाउड बनते हैं, जो बैक्टीरिया और वायरस को हवा में फैला देते हैं। वहीं एप्लाइड एंड एनवायर्नमेंटल माइक्रोबायोलॉजी (AEM) जर्नल की रिपोर्ट में ई.कोली और C. difficile जैसे खतरनाक बैक्टीरिया के फैलने की पुष्टि की गई है।
हर बार आपका ब्रश पूरी तरह संक्रमित नहीं होता, लेकिन थोड़ा भी एक्सपोजर ब्रिसल्स पर माइक्रोबियल लोड बढ़ा सकता है। इसलिए यह जानना बेहद जरूरी है कि ब्रश को कहां और कैसे रखा जाए।
"टॉयलेट में ब्रश रखना क्यों खतरनाक?" इस सवाल पर एक्सपर्ट डॉ. शीतल वर्मा, प्रोफेसर–क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी, KGMU लखनऊ बताती हैं—फ्लश के दौरान हवा में उठने वाले माइक्रो ड्रॉपलेट्स कई फीट तक जाकर ब्रश पर बैठ जाते हैं। छोटे बाथरूम, कम वेंटिलेशन और टॉयलेट के पास बने सिंक वाले घरों में यह खतरा और बढ़ जाता है।
ढक्कन खोलकर फ्लश करने से रिस्क और बढ़ जाता है। समय के साथ ऐसे दूषित ब्रश से ओरल इंफेक्शन, गम इंफ्लेमेशन, पेट संबंधी समस्याएं और कमजोर इम्यूनिटी वालों में गंभीर जोखिम बढ़ सकता है।
क्या ढक्कन बंद करने से खतरा खत्म? एक्सपर्ट कहती हैं—खतरा कम होता है, पूरी तरह नहीं रुकता। ढक्कन बंद रहने पर भी कुछ एयरोसोल गैप्स से बाहर निकल सकते हैं। इसलिए सबसे जरूरी है कि टूथब्रश जैसी जरूरी चीजें टॉयलेट से दूर रखें।
टॉयलेट में ब्रश रखने से लंबे समय में ओरल इंफेक्शन, पेट की बीमारियों और सूजन का खतरा बढ़ता है। इसीलिए टूथब्रश हाइजीन पर CDC ने भी गाइडलाइन जारी की है—ब्रश हमेशा टॉयलेट से दूर और सीधा रखकर एयर-ड्राई होने दें। गीले ब्रिसल्स में बैक्टीरिया ज्यादा टिकते हैं।
एक्सपर्ट बताती हैं कि ब्रश को टॉयलेट के बाहर सूखी जगह पर रखना सबसे सुरक्षित है। अगर जगह कम हो तो ऊंचे शेल्फ, वेंटिलेटेड कैबिनेट या ऐसा होल्डर इस्तेमाल करें जिसमें हवा का अच्छा प्रवाह रहे। ब्रश को कवर में बंद रखकर नमी फँसाना और खतरनाक हो सकता है।
टूथब्रश को हर 2 महीने में बदलना जरूरी है। बीमारी जैसे सर्दी-जुकाम, वायरल इंफेक्शन होने पर तुरंत बदलना और भी ज्यादा जरूरी है।
ब्रश को धोने का सही तरीका है—हर इस्तेमाल के बाद साफ पानी से अच्छे से धोकर झटक दें। हफ्ते में 1–2 बार ब्रिसल्स को माउथवॉश, 3% हाइड्रोजन पेरॉक्साइड या विनेगर में 10–15 मिनट भिगोकर सैनिटाइज कर सकते हैं। माइक्रोवेव, गरम पानी या डिशवॉशर का इस्तेमाल बिलकुल न करें।
क्या सिर्फ पानी से धोने से बैक्टीरिया हट जाते हैं? जवाब है—नहीं। पानी से सतही गंदगी साफ होती है, लेकिन माइक्रोब्स ब्रिसल्स के अंदर रह जाते हैं। इसलिए सही सफाई और समय-समय पर सैनिटाइजेशन जरूरी है।
बच्चों का ब्रश वॉशरूम में रखना और भी रिस्की है क्योंकि उनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है। टॉयलेट प्लम से जमने वाले कण बच्चों में ओरल इंफेक्शन, पेट की समस्याएं और सूजन बढ़ा सकते हैं।
अगर बाथरूम छोटा है, तो दरवाजे के बाहर वॉल-माउंटेड होल्डर लगाना बेहतर है। बाहर सिंक या शेल्फ का इस्तेमाल करें। अगर बाथरूम में ही रखना पड़े तो टॉयलेट से दूर, ऊँचाई पर और बंद कैबिनेट में रखें।
टॉयलेट में टूथब्रश रखने से बढ़ते संक्रमण के खतरे-
ओरल इंफेक्शन
ओरल इंफ्लेमेशन
गम इंफेक्शन
बैड ब्रीथ और बैक्टीरियल इंफेक्शन
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टूथब्रश हाइजीन के 10 आसान और वैज्ञानिक टिप्स—ब्रश को सुरक्षित रखने के सही तरीके।
ब्रश से पहले-बाद में हाथ धोएं, हर उपयोग के बाद ब्रश को पानी से साफ करें, ब्रश को टॉयलेट में न रखें, बंद बॉक्स में न रखें, नमी वाली जगह से दूर रखें, दूसरों के ब्रश से अलग रखें, ओपन/वेंटिलेटेड जगह पर रखें, ट्रैवल में कवर यूज़ करें, हफ्ते में एक बार सैनिटाइज करें और हर 2 महीने में ब्रश बदलें।
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