डॉक्टरों के अनुसार, महिला के ब्रेन में जिस स्थान पर बोलने से जुड़े सिग्नल होते हैं, वहीं ट्यूमर मौजूद था। इसी कारण ऑपरेशन के दौरान महिला को लगातार कुछ न कुछ बोलते रहने की सलाह दी गई। सिग्नल की सही स्थिति समझने के लिए महिला पूरे समय हनुमान चालीसा पढ़ती रही और डॉक्टरों के सवालों के जवाब देती रही।
42 वर्षीय महिला नवांशहर की रहने वाली है। डॉक्टरों ने बताया कि यह सर्जरी बेहद कठिन और जोखिम भरी थी, क्योंकि बिना बेहोशी के ब्रेन सर्जरी करना हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है। लेकिन इस केस में महिला को बेहोश करना संभव नहीं था। यह ऑपरेशन 17 जनवरी को किया गया था और शनिवार को महिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
प्राइवेट अस्पताल के न्यूरो और स्पाइन सर्जन डॉ. मनबचन सिंह ने बताया कि ट्यूमर दिमाग के उस हिस्से में था जो बोलने और भाषा समझने की शक्ति को नियंत्रित करता है। ऑपरेशन के दौरान जरा सी भी गलती महिला की आवाज हमेशा के लिए छीन सकती थी।
डॉक्टरों ने बताया कि अगर महिला को पूरी तरह बेहोश कर सर्जरी की जाती, तो यह पता लगाना संभव नहीं होता कि उसकी बोलने की क्षमता पर क्या असर पड़ रहा है। इसी खतरे से बचने के लिए ‘अवेक ब्रेन सर्जरी’ तकनीक अपनाई गई, जिसमें मरीज जागते हुए डॉक्टरों से बातचीत करता रहता है।
इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाने में एनेस्थीसिया टीम के डॉ. यासिर रजक और डॉ. सौरव भटेजा का भी अहम योगदान रहा। न्यूरो-नेविगेशन सिस्टम से ट्यूमर की सटीक जगह की पहचान की गई और सीयूएसए मशीन की मदद से ट्यूमर को बेहद सावधानी से हटाया गया, ताकि बोलने वाली नसें सुरक्षित रहें।
करीब तीन घंटे चली इस सर्जरी के दौरान महिला लगातार हनुमान चालीसा का पाठ करती रही। इससे डॉक्टरों को हर पल यह फीडबैक मिलता रहा कि दिमाग का संबंधित हिस्सा सही तरह से काम कर रहा है। अब महिला पूरी तरह स्वस्थ है और उसकी बोलने व समझने की क्षमता सुरक्षित है।
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