भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : बिलासपुर। सरकंडा थाना क्षेत्र के विजयापुरम इलाके में शनिवार सुबह घरेलू कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया। करीब 400 कामवाली बाइयां अपनी मांगों को लेकर काम पर नहीं पहुंचीं और सोसायटी के सामने धरने पर बैठ गईं, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
बाइयों की मांग है कि उनका वेतन बढ़ाया जाए, महीने में 3 दिन बिना कटौती के छुट्टी दी जाए और काम पर आने-जाने के लिए अलग से किराया दिया जाए। बाइयों के अचानक काम बंद करने से सैकड़ों घरों में रोजमर्रा का काम प्रभावित हो गया।
बताया गया कि विजयापुरम कॉलोनी में करीब 1500 मकान हैं। इसके पीछे अटल आवास स्थित है, जहां की अधिकांश महिलाएं झाड़ू-पोछा, बर्तन और घरेलू काम के लिए विजयापुरम आती हैं।
लेकिन अटल आवास से विजयापुरम को जोड़ने वाला रास्ता सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया गया है। ऐसे में बाइयों को अब 4 से 5 किलोमीटर का चक्कर लगाकर काम पर पहुंचना पड़ रहा है। बाइयों की प्रमुख मांग है कि इस रास्ते को खोला जाए या फिर आने-जाने का अलग से भाड़ा दिया जाए।
बाइयों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
– महीने का वेतन बढ़ाया जाए, क्योंकि मौजूदा मेहनताना कम है।
– हफ्ते में 3 दिन बिना सैलरी कटे छुट्टी दी जाए।
– सभी बाइयों के लिए आई-कार्ड बनाए जाएं।
– सोसायटी तक पहुंचने वाला बंद रास्ता फिर से खोला जाए।
शनिवार सुबह से ही सैकड़ों बाइयां सोसायटी के बाहर एकजुट होकर धरने पर बैठ गईं। इसका असर ऐसा रहा कि कई घरों में सुबह की चाय तक नहीं बन पाई और नाश्ता भी समय पर नहीं हो सका।
सोसायटी निवासी महिला अधिवक्ता नुपूर ने बताया कि उनकी कामवाली बाई बिना सूचना दिए नहीं आई और फोन भी नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि घर का काम छोड़कर कोर्ट जाना उनकी मजबूरी है।
सैलरी बढ़ाने को लेकर उन्होंने कहा कि काम की कोई तय सैलरी नहीं होती, हर जगह रेट अलग-अलग है। जितनी जरूरत बाइयों को है, उतनी ही जरूरत घरों को भी है, इसलिए दोनों पक्षों को समझदारी से समाधान निकालना होगा।
सुबह होते ही रोज की तरह गृहणियां काम का इंतजार करती रहीं, लेकिन झाड़ू-पोछा, बर्तन और खाना बनाने वाली बाइयां कहीं नजर नहीं आईं। इससे महिलाओं की परेशानियां और बढ़ गईं।
हड़ताल कर रहीं किरण वर्मा ने बताया कि सोसायटी के कुछ लोगों ने उन्हें प्रदर्शन से हटने को कहा और पुलिस बुलाने की बात कही। बाइयों ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं होगा, वे काम पर वापस नहीं जाएंगी।
हड़ताल का सबसे ज्यादा असर गृहणियों पर पड़ा है। कई महिलाओं का कहना है कि एक दिन भी बिना बाइयों के घर संभालना बेहद मुश्किल हो गया है और सभी को जल्द समाधान की उम्मीद है।
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