भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : छत्तीसगढ़ में पहली बार लैंगिक अपराध से पीड़ित नाबालिगों के लिए एक बड़ा और अहम कदम उठाया गया है। दुष्कर्म और छेड़छाड़ जैसे गंभीर मामलों से जूझ रहे बच्चों और उनके परिजनों को अब सपोर्ट पर्सन के माध्यम से मानसिक और विधिक सहायता मिलेगी।
कर्नाटक, झारखंड और मध्यप्रदेश की तर्ज पर राज्य में कुल 9 सपोर्ट पर्सन नियुक्त किए गए हैं। केस दर्ज होने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से मामलों को सपोर्ट पर्सन को सौंपा जाता है। इसके बाद वे पीड़ित नाबालिग और उनके परिवार को हर स्तर पर सहयोग प्रदान करते हैं।
सपोर्ट पर्सन न केवल बच्चों और परिजनों से नियमित मुलाकात कर काउंसलिंग करते हैं, बल्कि हर विजिट की रिपोर्ट भी तैयार करते हैं। यह रिपोर्ट महिला एवं बाल विकास विभाग के जरिए मंत्रालय तक भेजी जाती है। जून 2025 में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के बाद राज्य सरकार ने सपोर्ट पर्सन नियुक्त करने के निर्देश दिए थे।
फिलहाल नाबालिगों से जुड़े करीब 100 प्रकरण हैं। प्रत्येक सपोर्ट पर्सन को 10-10 केस सौंपे गए हैं, जिनमें ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्र शामिल हैं। अधिकतर मामले छोटी बस्तियों से जुड़े हैं। विभाग ने पूजा चंद्राकर, एकता भदौरिया, राजेश ठक्कर, नीता चौरसिया, स्वाति शेरपा, विभा मिश्रा, भारती देशलहरा, आशीष कुमार और एक संस्था को यह जिम्मेदारी सौंपी है।
सपोर्ट पर्सन ने बताया कि इस काम में कई चुनौतियां भी सामने आती हैं। छोटी बस्तियों से जुड़े मामलों में कई बार नाबालिग और उनके माता-पिता सहयोग नहीं करते।
केस दर्ज होने से फैसले तक लगातार सहयोग
सपोर्ट पर्सन के अनुसार, केस दर्ज होने से लेकर कोर्ट के फैसले तक नाबालिग और उनके परिवार के साथ रहना पड़ता है। एक मामले में पीड़ित नाबालिग दिव्यांग है, जो न बोल सकता है, न सुन सकता है और न ही पढ़-लिख सकता है। उसकी काउंसलिंग बेहद कठिन थी, इसलिए उसे एक संस्था में भर्ती कराया गया है।
कई मामलों में घटना के बाद माता-पिता आत्महत्या तक करने को उतारू हो जाते हैं। आसपास के लोग पीड़ित बच्चों को ही परेशान करने लगते हैं। एक बस्ती में काउंसलिंग के दौरान नशेड़ी व्यक्ति चाकू लेकर आ गया था। पति साथ होने के कारण सपोर्ट पर्सन सुरक्षित वहां से निकल सकीं।
अपराध के बाद पूरा परिवार टूट जाता है
एक अन्य सपोर्ट पर्सन ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लैंगिक अपराध की घटनाओं के बाद पूरा परिवार मानसिक, सामाजिक और आर्थिक संकट में आ जाता है। पावर हाउस क्षेत्र के एक मामले में आरोपी ने नाबालिग पीड़िता का हाथ काट दिया था। पिता की मौत हो चुकी है और मां नौकरी कर घर चला रही है।
पीड़िता का ऑपरेशन होना है, लेकिन आर्थिक मदद नहीं मिल पा रही है। नियमित पढ़ाई छूट गई है और मजबूरी में उसे प्राइवेट पढ़ाई करनी पड़ रही है। जोरातरई के एक मामले में छेड़छाड़ की शिकायत के बाद आरोपी जेल में है, लेकिन अब परिवार पर समझौते का दबाव बनाया जा रहा है।
अपराध दर्ज कराने के बाद नाबालिग और उनके परिजनों को सामाजिक दुष्प्रभावों का भी सामना करना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
यह भी पढ़े -2026 में बिना पंचांग देखे शादी-गृह प्रवेश, जानिए साल की 7 सबसे शुभ तिथियां! हर मांगलिक कार्य होगा सिद्ध..
यह भी पढ़े - New Year 2026: सूर्य का साल रहेगा 2026, घर लाएं ये शुभ चीजें, बढ़ेगा मान-सम्मान और तरक्की.
यह भी पढ़े -सर्दियों में वर्कआउट बना सकता है दिल के लिए खतरा, ठंड में एक्सरसाइज से पहले जान लें ये जरूरी नियम..
भिलाई की पत्रिका न्यूज़ के whatsup ग्रुप से जुड़ने के लिए लिंक पर क्लिक कर ज्वाइन करे




