यह मामला कोरबा जिले के बालको थाना क्षेत्र का है। वीडियो में देखा जा सकता है कि छात्र तीन ब्लैक स्कॉर्पियो में सवार हैं। चलती गाड़ी की खिड़कियों से बाहर निकलकर कोई वीडियो बना रहा है तो कोई मोबाइल से सेल्फी ले रहा है। इस दौरान लड़कियां भी विंडो से बाहर झुककर पोज देती नजर आती हैं।
बताया जा रहा है कि यह वीडियो फेयरवेल पार्टी से जुड़ा हुआ है। स्टूडेंट्स टीपी नगर स्थित महाराजा होटल में आयोजित फेयरवेल पार्टी में शामिल होने पहुंचे थे। लेकिन होटल पहुंचने से पहले ही उन्होंने चलती गाड़ियों में स्टंट करते हुए वीडियो बना लिए।
फेयरवेल पार्टी के बाद भी स्टूडेंट्स स्कॉर्पियो से घूमने निकल गए। बाद में पंजाबी गाने के साथ इन वीडियो को इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया गया, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आ गई है। पुलिस अब वीडियो में दिख रही गाड़ियों की नंबर प्लेट के आधार पर वाहन मालिक की पहचान करने में जुटी है। पुलिस का साफ कहना है कि ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के मुताबिक यह वीडियो जनवरी 2026 का है। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि फेयरवेल पार्टी किस स्कूल की ओर से आयोजित की गई थी। वीडियो में कुछ छात्र चलती गाड़ी के दोनों तरफ की खिड़कियों से बाहर निकलकर स्टंट करते नजर आते हैं, जबकि एक युवक वाहन चलते समय मोबाइल से सेल्फी लेता दिखाई देता है।
महाराजा होटल के अंदर के भी वीडियो सामने आए हैं, जिसमें स्टूडेंट्स केक काटते और डांस करते नजर आ रहे हैं।
इस लापरवाही पर बाल कल्याण समिति ने भी चिंता जताई है। समिति के सदस्य मनोज ठाकुर ने कहा कि नाबालिगों द्वारा बाइक और कार चलाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। यह वीडियो बेहद खतरनाक है और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता था। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है। साथ ही पालकों को भी यह समझना चाहिए कि उनके बच्चे किन परिस्थितियों में हैं।
वहीं कोरबा CSP प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि वायरल वीडियो के आधार पर वाहन नंबर से मालिक की पहचान की जा रही है। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। सड़क सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
इससे पहले भी छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट स्टंटबाजी, बर्थडे सेलिब्रेशन और केक कटिंग जैसे मामलों पर सख्त रुख अपना चुका है। हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर राज्य शासन से जवाब मांगा था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि सार्वजनिक सड़कों पर स्टंट करने वालों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि यह दूसरों के लिए सबक बने।
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि कई बार पुलिस गरीब और मध्यम वर्ग पर सख्ती दिखाती है, जबकि संपन्न लोगों को मामूली जुर्माना लगाकर छोड़ दिया जाता है। शासन की ओर से कहा गया कि सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं और नियमों का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है।
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