नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण सोनपुर थाना क्षेत्र में अब तक 36 मामले दर्ज किए गए हैं, लेकिन ये सभी केस नक्सली मुठभेड़ों से जुड़े हुए हैं। आम आपराधिक मामलों की यहां कोई एंट्री ही नहीं है।
जब ग्रामीणों से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि उन्होंने कभी घर में ताला तक नहीं लगाया। गांव में अगर कोई छोटा-मोटा विवाद हो भी जाए, तो सभी लोग मिलकर आपस में बैठकर उसका समाधान निकाल लेते हैं। कई ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कभी थाने का दरवाजा तक नहीं देखा।
सोनपुर थाने में तैनात प्रधान आरक्षक दिनेश कुमार तामो ने बताया कि थाने में कुल 23 पुलिसकर्मी पदस्थ हैं। आज तक कोई भी शिकायत दर्ज कराने थाने नहीं आया। यहां न जमीन विवाद होता है और न ही आपसी झगड़े। अधिकतर गांवों में आदिवासी समाज के लोग रहते हैं, जो इतने शांत स्वभाव के हैं कि ऊंची आवाज में बात करना भी पसंद नहीं करते।
हवालात का दरवाजा बीते पांच साल में सिर्फ एक बार खुला था। पंचायत चुनाव के दौरान मतपेटियों को सुरक्षित रखने के लिए हवालात का उपयोग किया गया था। उस समय के निशान आज भी दरवाजे पर दिखाई देते हैं। इसके बाद से हवालात कभी बंद नहीं हुई, यहां तक कि ताला भी नहीं लगाया गया।
गरपा गांव की रहने वाली सुकमती मेटामी बताती हैं कि उनके गांव में किसी के घर में ताला लगाने की परंपरा नहीं है। अगर कोई बीमार पड़ जाए और मजबूरी में घर छोड़ना पड़े, तो पूरा गांव उस घर की रखवाली करता है। किसी तरह का झगड़ा होने पर पंच बैठकर जो फैसला लेते हैं, उसे सभी मानते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें यह तक पता नहीं था कि उनके गांव के लिए अलग से कोई थाना है। कभी-कभी एक-दो महीने में पुलिसकर्मी दिख जाते हैं, तो लोग यही समझते हैं कि वे नक्सलियों की तलाश में निकले होंगे।
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