नई व्यवस्था के तहत थाना क्षेत्रों को छोटे-छोटे बीट में बांटा जाएगा। हर बीट के लिए एक प्रभारी नियुक्त होगा, जो अपने इलाके में होने वाली हर गतिविधि का जिम्मेदार रहेगा। उस क्षेत्र में अपराध, संदिग्ध गतिविधियों और बदमाशों पर नजर रखने की जिम्मेदारी उसी प्रभारी की होगी।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस व्यवस्था से अपराध नियंत्रण में मदद मिलेगी और आम जनता का भरोसा पुलिस पर और मजबूत होगा। इसे स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
बीट सिस्टम के साथ-साथ पुलिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का भी ज्यादा इस्तेमाल करेगी। नए सॉफ्टवेयर और आधुनिक उपकरणों को पुलिसिंग का हिस्सा बनाया जाएगा। इस दिशा में सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश में काम हो रहा है।
पिछले साल नवंबर में हुई डीजीपी-आईजीपी कॉन्फ्रेंस के बाद पुलिसिंग को लेकर 107 बिंदुओं का एजेंडा तैयार किया गया था। यह एजेंडा जनवरी में सभी राज्यों को भेजा गया है, जिस पर पूरे एक साल तक काम किया जाएगा। इसके बाद इस साल होने वाली अगली डीजीपी-आईजीपी कॉन्फ्रेंस में इसकी समीक्षा की जाएगी।
पुलिस ने साफ किया है कि इस साल बीट सिस्टम को गंभीरता से लागू किया जाएगा। हर थाना और हर विंग में यह व्यवस्था लागू होगी। खासतौर पर थाना स्तर और क्राइम ब्रांच में इसे तुरंत प्रभाव से मजबूत करने की तैयारी है। हालांकि कई शहरों में बीट सिस्टम पहले से है, लेकिन अब इसे नए सिरे से और असरदार बनाया जाएगा।
बीट प्रभारी निगरानी बदमाशों और असामाजिक तत्वों पर नजर रखेंगे और इलाके के लोगों से लगातार संवाद बनाए रखेंगे। थाने के हर कर्मचारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी, ताकि जवाबदेही साफ रहे।
ट्रैफिक प्रबंधन में भी एआई सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे वाहनों की ट्रेसिंग, ट्रैकिंग और भीड़ की निगरानी जैसे काम किए जाएंगे। थानों के स्टाफ को एआई तकनीक की ट्रेनिंग दी जाएगी। साइबर सेल और क्राइम ब्रांच भी इस तकनीक का उपयोग करेगी, जिससे आरोपियों को पकड़ने और ब्लाइंड केस सुलझाने में मदद मिलेगी।
नवंबर में हुई डीजीपी कॉन्फ्रेंस में सूखे नशे पर भी लंबी चर्चा हुई थी। सभी राज्यों को इस पर विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्र सरकार बड़े स्तर पर कार्रवाई की तैयारी में है। छत्तीसगढ़ में रायपुर समेत 10 जिलों में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन किया गया है, ताकि नशे की सप्लाई चेन तोड़ी जा सके।
इसके साथ ही सभी राज्यों को एंटी टेररिस्ट स्क्वाड यानी एटीएस को मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए हैं। छत्तीसगढ़ में 24 साल बाद 2025 में एटीएस थाना शुरू किया गया है और कार्रवाई भी शुरू हो चुकी है। जल्द ही इसमें भर्ती, मैनपावर और हाईटेक सिस्टम बढ़ाए जाएंगे।
इस पूरी योजना के तहत महिला अपराध, मानव तस्करी, साइबर क्राइम, सामुदायिक पुलिसिंग, नशा मुक्ति, बाल अपराध और बेसिक पुलिसिंग सिस्टम पर विशेष काम किया जाएगा।
27 जनवरी को नवा रायपुर स्थित पुलिस मुख्यालय में सीएम विष्णुदेव साय और डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने डीजीपी कॉन्फ्रेंस की रिपोर्ट को लेकर बैठक ली थी। उसी बैठक के आधार पर 107 बिंदुओं की रिपोर्ट तैयार की गई है, जिस पर एक साल में काम कर अगली कॉन्फ्रेंस में रिपोर्ट पेश की जाएगी।
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