उन्हें तिलक मार्ग थाना पुलिस ने सुबह गिरफ्तार किया था। पुलिस ने कोर्ट से 7 दिन की रिमांड मांगी थी और दावा किया कि घटना के पीछे चिब ही मुख्य साजिशकर्ता हैं। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारी उनके निर्देश पर भारत मंडपम में आयोजित समिट में पहुंचे थे और उन्हें लॉजिस्टिक सहयोग भी दिया गया था।
इस पूरे मामले की जांच अब दिल्ली पुलिस की इंटर-स्टेट क्राइम ब्रांच टीम को सौंपी गई है।
चिब की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने कहा कि यह कार्रवाई असंवैधानिक है और इसे तानाशाही मानसिकता का परिणाम बताया। राहुल गांधी ने भी सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्हें अपने साथियों पर गर्व है, जिन्होंने देश के हित में आवाज उठाई।
दरअसल, 20 फरवरी को इंडियन यूथ कांग्रेस के 11 सदस्य भारत मंडपम में आयोजित AI समिट के दौरान हॉल के भीतर पहुंच गए थे। वहां उन्होंने शर्टलैस होकर पीएम की फोटो वाली टी-शर्ट लहराई और नारे लगाए।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कहा कि चिब का अन्य आरोपियों से आमना-सामना कराना जरूरी है और बड़ी साजिश की जांच के लिए कस्टोडियल पूछताछ आवश्यक है। कुछ आरोपी जम्मू, अमेठी और हिमाचल प्रदेश में बताए गए हैं।
वहीं चिब के वकील ने तर्क दिया कि प्रदर्शनकारियों से 7-8 टी-शर्ट बरामद हुई हैं और टी-शर्ट कहीं भी छपवाई जा सकती हैं। केवल इस आधार पर कस्टोडियल पूछताछ जरूरी नहीं है।
अब तक इस मामले में 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। मध्य प्रदेश के ग्वालियर से भी 3 कांग्रेस नेताओं को पकड़ा गया है। घटना वाले दिन 4 आरोपी गिरफ्तार हुए थे।
कांग्रेस ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि संविधान हर नागरिक को विरोध का अधिकार देता है और पार्टी इन कार्रवाइयों से डरने वाली नहीं है।
इंडियन यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव शेष नारायण ओझा ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को देश विरोधी नहीं कहा जा सकता। उनका आरोप है कि कई राज्यों में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, जबकि जंतर-मंतर पर भी नेताओं को हिरासत में लिया गया।
22 फरवरी को दिल्ली पुलिस ने यूथ कांग्रेस नेता कृष्ण हरि की कार से पीएम की फोटो छपी टी-शर्ट और पोस्टर बरामद किए।
21 फरवरी को भाजपा ने देशभर में इस घटना के विरोध में प्रदर्शन किए। दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, बिहार, तेलंगाना और जम्मू-कश्मीर में विरोध कार्यक्रम हुए। मुंबई के मुलुंड में राहुल गांधी के काफिले को काले झंडे दिखाए गए।
दिल्ली पुलिस अधिकारी आईपीएस देवेश कुमार महला के अनुसार, घटना दोपहर करीब 12:30 बजे हुई। प्रदर्शनकारियों ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया और क्यूआर कोड स्कैन कर समिट हॉल में प्रवेश किया। उन्होंने ऊपर स्वेटर और जैकेट पहनी थी और अंदर टी-शर्ट। हॉल नंबर 5 के पास उन्होंने जैकेट उतारकर टी-शर्ट लहराते हुए विरोध जताया। पुलिस के साथ झड़प के भी आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पहले काले छाते पर स्टिकर लगाकर अंदर जाने की योजना थी, लेकिन जांच की आशंका के चलते टी-शर्ट पर स्टिकर लगाए गए। स्टिकर कहां छपे, इसकी जांच जारी है।
फिलहाल मामला सियासी बहस का केंद्र बना हुआ है। आगे की कार्रवाई और जांच पर सबकी नजरें टिकी हैं। देश और प्रदेश की हर बड़ी राजनीतिक अपडेट के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।
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