जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित बस्तर पंडुम के मंच से गृह मंत्री अमित शाह ने यह बातें कहीं। मंच पर पहुंचने से पहले पारंपरिक अंदाज में उनका स्वागत किया गया, उन्हें कौड़ी की माला और पारंपरिक पगड़ी पहनाई गई।
अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ से नक्सली गतिविधियों का तेजी से सफाया हो रहा है। अब गिने-चुने नक्सली ही बचे हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर की यह ललकार तेलंगाना में छिपे नक्सलियों तक भी पहुंचनी चाहिए।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि जो न.क्स.ली आत्मसमर्पण करेंगे, उन्हें कोई आंच नहीं आएगी, लेकिन स्कूल और अस्पताल ज.ला.ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उनका कहना था कि तय समय सीमा में नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा।
गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर पंडुम पहले केवल 7 विधाओं तक सीमित था, लेकिन अब इसमें 5 नई विधाएं जुड़ने से कुल 12 विधाएं हो गई हैं। इससे बस्तर की कला, संस्कृति, खानपान, नृत्य और नाटक को नया मंच मिला है, जो दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिलता।
उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम के समय से बस्तर की संस्कृति को सहेज कर रखा गया है। बस्तर पंडुम ने इस विरासत को आगे बढ़ाने का काम किया है। आयोजन में करीब 55 हजार लोगों की सहभागिता रही, जिसमें दंतेवाड़ा से सबसे ज्यादा भागीदारी दर्ज की गई। अबूझमाड़िया, माड़िया और मुरिया जनजातियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
अमित शाह ने कहा कि कभी नक्सलियों के डर से सहमा रहने वाला बस्तर अब अपनी संस्कृति और विरासत के लिए पहचाना जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि नक्सलवाद खत्म होते ही बस्तर में नई टूरिज्म गतिविधियां शुरू होंगी।
उन्होंने बताया कि बस्तर में 118 एकड़ में नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है, जिससे आदिवासी युवाओं को रोजगार मिलेगा। रावघाट परियोजना भी तेजी से आगे बढ़ रही है, जो क्षेत्र के विकास को नई गति देगी।
इस मौके पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में 45 वर्षों से अधिक समय तक नक्सलवाद का प्रभाव रहा। लाल आतंक के कारण यहां के लोगों को लंबे समय तक बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल सकीं। लेकिन गृह मंत्री की दृढ़ इच्छाशक्ति और जवानों के साहस से मात्र दो वर्षों में हालात बदले हैं।
सीएम साय ने कहा कि बस्तर पंडुम बस्तर की संस्कृति और पहचान का प्रतीक है। एक समय था जब नक्सलवाद खत्म होने की कल्पना भी मुश्किल थी, लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।
वहीं मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर की सभ्यता और संस्कृति पूरी दुनिया में अनूठी है। पूरे बस्तर को एक सूत्र में जोड़ने के उद्देश्य से बस्तर पंडुम का आयोजन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि 24 अगस्त 2024 को बस्तर को न.क्स.ल.वा.द से मुक्त करने की घोषणा की गई थी। आज स्थिति यह है कि केवल 10 से 15 प्रतिशत न.क्स.ली ही बचे हैं। उन्हें मुख्यधारा में लौटने का अवसर दिया जा रहा है।
पिछले डेढ़ साल में बस्तर की तस्वीर बदली है। जहां 20-20 वर्षों तक सड़कें नहीं थीं, वहां अब सड़कें बन चुकी हैं। बस्तर के 43 गांव ऐसे हैं, जहां पहली बार तिरंगा फहराया गया है।
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