शनिवार 7 फरवरी को सुकमा जिले में 7 पुरुष और 14 महिला नक्सलियों ने पुलिस अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण किया। इन सभी पर कुल 76 लाख रुपए का इनाम घोषित था।
वहीं बीजापुर जिले में साउथ सब जोनल ब्यूरो से जुड़े 30 सक्रिय माओवादी कैडरों ने भी हि*सा का रास्ता छोड़ दिया। इनमें 20 महिलाएं और 10 पुरुष शामिल हैं, जिन पर कुल 85 लाख रुपए का इनाम था।
ऑटोमैटिक वेपन के साथ पहुंचे
सुकमा में आत्मसमर्पण करने वालों में DVC सदस्य सोढ़ी महेश, पोडियम राजू और कारम ममता भी शामिल हैं, जिन पर 8-8 लाख रुपए का इनाम घोषित था।
अन्य में 5 पर 5 लाख, एक पर 3 लाख और 12 पर 2 लाख रुपए का इनाम तय था।
ये सभी कैडर बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा क्षेत्रों में सक्रिय थे और अपने साथ AK-47, इंसास, BGL लॉन्चर जैसे ऑटोमैटिक वेपन, गोला-बारूद और अन्य सामग्री लेकर आए, जिसे पुलिस को सौंप दिया गया।
अलग-अलग डिवीजन में थे सक्रिय
सुकमा SP किरण चव्हाण ने बताया कि दरभा डिवीजन, दक्षिण बस्तर डिवीजन, केकेबीएन डिवीजन (ओडिशा) और इंद्रावती एरिया कमेटी में सक्रिय कुल 21 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया है।इनमें 3 DVCM, 5 ACM और 13 पार्टी सदस्य शामिल हैं।
इन गतिविधियों में रहे शामिल
आत्मसमर्पण करने वाले ये कैडर सुरक्षा बलों पर हमलों, ग्रामीण इलाकों में हिसक घटनाओं, सड़क व निर्माण कार्यों में बाधा, हथियार और विस्फोटक परिवहन, संगठन विस्तार और प्रशिक्षण गतिविधियों से जुड़े रहे हैं।
संगठन की जड़ें हो रहीं कमजोर
बस्तर IG सुंदरराज पी ने कहा कि ‘पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन’ अभियान से माओवादी संगठन की जड़ें कमजोर हो रही हैं। उन्होंने शेष कैडरों से भी हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की।
बीजापुर में भी बड़ा आत्मसमर्पण
बीजापुर जिले में 7 फरवरी को उप पुलिस महानिरीक्षक (केरिपु ऑप्स) बीजापुर सेक्टर बी.एस. नेगी और SP डॉ. जितेंद्र कुमार यादव सहित वरिष्ठ अधिकारियों के सामने 30 कैडरों ने आत्मसमर्पण किया।
इनमें कंपनी नंबर 2 और 7 के सदस्य, एक PPCM, चार ACM, 17 पार्टी सदस्य, एक DAKMS अध्यक्ष, एक KAMS अध्यक्ष और तीन जनताना सरकार अध्यक्ष शामिल हैं।
पुनर्वास प्रक्रिया के दौरान कैडरों ने एक बंडल कार्डेक्स वायर और 50 जिलेटिन स्टिक भी सुरक्षा बलों को सौंपी। शासन की योजना के तहत प्रत्येक कैडर को ₹50,000 की आर्थिक सहायता दी गई।
31 मार्च 2026 की डेडलाइन
बस्तर को नाक्सलमु*क्त बनाने का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक की डेडलाइन तय की है, जिसमें अब करीब 90 दिन शेष हैं।
पिछले 40 वर्षों से सक्रिय संगठन का प्रभाव अब काफी कमजोर हो चुका है। डेढ़ साल में 23 बड़े नाक्सली मा*रे जा चुके हैं, जबकि कई बड़े नामों ने अपने साथियों के साथ आत्मसमर्पण किया है।
बस्तर में सीमित संख्या में कैडर शेष
वर्तमान में बस्तर के अलग-अलग इलाकों में करीब 200 से 300 आर्म कैडर ही बचे बताए जा रहे हैं, जो छोटे-छोटे समूहों में छिपे हुए हैं। MMC जोन पूरी तरह समाप्त हो चुका है, जबकि उत्तर बस्तर और माड़ डिवीजन से भी संगठन का लगभग सफाया हो गया है।
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