इन सवालों के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि कौन पक्के मकान में रह रहा है, किसके पास शौचालय है, खाना गैस पर बनता है या नहीं और घर तक इंटरनेट पहुंचा है या नहीं। सरकारी तैयारी के अनुसार इस बार जनगणना कर्मी टैबलेट आधारित डिजिटल सिस्टम से डाटा दर्ज करेंगे, ताकि योजनाएं कागजों तक सीमित न रहें।
घर की पहचान और बनावट से होगी शुरुआत
जनगणना टीम सबसे पहले भवन नंबर और जनगणना मकान नंबर दर्ज करेगी। इसके बाद फर्श, दीवार और छत की स्थिति पूछी जाएगी। मकान रिहायशी है या किसी अन्य उपयोग में, साथ ही उसकी हालत अच्छी, रहने लायक या जर्जर है, यह भी रिकॉर्ड होगा। परिवार मुख्य रूप से कौन-सा अनाज खाता है, यह जानकारी भी ली जाएगी। अंत में एक मोबाइल नंबर दर्ज किया जाएगा, जिसका उपयोग सिर्फ जनगणना से जुड़ी आधिकारिक सूचना के लिए होगा।
परिवार की बनेगी पूरी तस्वीर
घर के बाद परिवार की जानकारी ली जाएगी। परिवार में सामान्य रूप से रहने वाले सदस्यों की संख्या, परिवार क्रमांक और मुखिया का नाम दर्ज होगा। मुखिया का लिंग और सामाजिक वर्ग से जुड़ी जानकारी भी पूछी जाएगी। घर में रहने वाले विवाहित दंपत्तियों की संख्या भी जनगणना का हिस्सा होगी।
कमरे, स्वामित्व और भीड़ का डाटा
मकान खुद का है या किराए का, यह सवाल भी अहम रहेगा। रहने के लिए कुल कितने कमरे हैं, यह जानकारी आवासीय घनत्व की वास्तविक स्थिति बताएगी।
पानी, बिजली और शौचालय की हकीकत
पीने का पानी किस स्रोत से आता है, घर में उपलब्ध है या बाहर से लाना पड़ता है, यह दर्ज होगा। रोशनी का मुख्य साधन, शौचालय की उपलब्धता, स्नानगृह और गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था भी पूछी जाएगी।
रसोई और ईंधन पर भी सवाल
घर में अलग रसोई है या नहीं, एलपीजी या पीएनजी कनेक्शन मौजूद है या नहीं और खाना पकाने में किस ईंधन का इस्तेमाल होता है, यह जानकारी योजनाओं के असर को समझने में मदद करेगी।
डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक सुविधाएं भी होंगी दर्ज
जनगणना में अब यह भी शामिल होगा कि घर में रेडियो, टीवी, इंटरनेट, कंप्यूटर या लैपटॉप है या नहीं। मोबाइल, टेलीफोन और स्मार्टफोन की उपलब्धता भी रिकॉर्ड की जाएगी।
साइकिल से कार तक की गिनती
परिवार के पास साइकिल, स्कूटर, मोटरसाइकिल या चार पहिया वाहन है या नहीं, यह जानकारी भी ली जाएगी। इससे आर्थिक स्थिति का एक संकेत मिलेगा।
33 सवाल तय करेंगे आने वाली योजनाएं
विशेषज्ञों के मुताबिक यह डाटा आने वाले वर्षों की नीतियों की नींव बनेगा। आवास, पेयजल, स्वच्छता, ऊर्जा और डिजिटल कनेक्टिविटी से जुड़ी योजनाएं इन्हीं आंकड़ों पर आधारित होंगी। इस बार जनगणना का मकसद सिर्फ यह जानना नहीं है कि लोग कितने हैं, बल्कि यह समझना है कि वे कैसे जी रहे हैं।
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