अभिजीत सिंह, कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी, ने आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि पूरे दुर्ग जिले में रात्रि 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर और अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर 30 जून 2026 तक प्रतिबंध रहेगा।
यह फैसला सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा 14 फरवरी 2000 को अधिसूचित ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम 2000 के तहत लिया गया है।
प्रशासन का कहना है कि विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों की पढ़ाई में किसी प्रकार का व्यवधान न हो, इसलिए यह कदम जरूरी था।
हालांकि धार्मिक त्यौहार, विवाह, संस्कार, उत्सव और चुनाव प्रचार जैसे विशेष अवसरों पर संबंधित अनुविभागीय दण्डाधिकारी से अनुमति ली जा सकेगी। अनुमति कुछ शर्तों के साथ दी जाएगी।
शर्तों के अनुसार ध्वनि विस्तारक यंत्र धीमी आवाज में चलाया जाएगा और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का पालन अनिवार्य होगा। निजी परिसर में ध्वनि स्तर निर्धारित सीमा से 5 डीबी (ए) से अधिक नहीं होगा।
सार्वजनिक स्थलों पर ध्वनि स्तर क्षेत्रीय मानक से 10 डीबी (ए) या अधिकतम 75 डीबी से अधिक नहीं होना चाहिए। लाउडस्पीकर का उपयोग केवल सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक ही किया जा सकेगा।
कार्यक्रम आयोजित करने से पहले नगर निगम या संबंधित सक्षम प्राधिकारी, जैसे बीएसपी प्रशासन, से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य होगा।
जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि किसी भी स्थिति में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच अनुमति नहीं दी जाएगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
अगर आप भी किसी कार्यक्रम की तैयारी कर रहे हैं, तो नियमों का पालन जरूर करें। जिले की शांति और विद्यार्थियों के भविष्य के लिए प्रशासन के इस फैसले का साथ दें। ऐसे ही स्थानीय और जरूरी अपडेट के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।
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