कीमतें बढ़ीं तो याद आए गिरवी जेवर! 15 साल पुराने गिरवी जेवर छुड़ाने पहुंचे ग्राहक, विवाद गहराया..कई ने कहा – रिकॉर्ड दीमक खा गए, जेवर गला चुके..

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : सोने-चांदी के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचते ही सराफा बाजार में एक अजीब सी हलचल देखने को मिल रही है। 10 से 15 साल पहले गिरवी रखे गए जेवर अब अचानक लोगों को याद आने लगे हैं। भोपाल और इंदौर के सराफा बाजार में ऐसे पुराने ग्राहक पहुंच रहे हैं, जिनके आने से दुकानदार भी पसोपेश में पड़ गए हैं।

नरसिंहगढ़ के रहने वाले संजय जाटव बताते हैं कि उन्होंने करीब 12 साल पहले 60 हजार रुपये किलो के भाव से चांदी खरीदी थी, जिसे पैसों की जरूरत पड़ने पर सुनार के यहां गिरवी रख दिया था। अब जब चांदी का भाव 3 लाख रुपये किलो से ऊपर पहुंच गया है, तो वे जेवर छुड़वाने आए। लेकिन न तो उन्होंने कभी ब्याज चुकाया और न ही सुनार के पास उस समय का कोई पुख्ता रिकॉर्ड मिला।

Gold Silver Price High Sarafa Bazaar mein 15 saal purane girvi jewar ko lekar tanav

मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार संजय जैसे कई लोग इन दिनों सराफा बाजार का रुख कर रहे हैं। ये वे ग्राहक हैं, जिन्होंने सालों पहले जेवर गिरवी रखे, फिर न मूलधन की सुध ली और न ब्याज चुकाया। जैसे ही सोना-चांदी ऑल टाइम हाई पर पहुंचा, इन पुराने मामलों ने फिर से सिर उठा लिया।

जिन सुनारों के पास ये जेवर गिरवी रखे गए थे, वे असमंजस में हैं। कई मामलों में 10–15 साल पुराने रजिस्टर या तो दीमक खा चुके हैं या इतने पुराने हो गए हैं कि हिसाब ढूंढना मुश्किल हो रहा है। साहूकारी नियमों के अनुसार, यदि कोई ग्राहक सात साल तक ब्याज नहीं देता है, तो साहूकार गिरवी रखी वस्तु का निपटान कर सकता है। इसी प्रावधान के तहत कई जेवर पहले ही गलाए जा चुके हैं।

इस स्थिति के चलते कई जगह ग्राहकों और व्यापारियों के बीच विवाद की स्थिति बन रही है। भोपाल सराफा एसोसिएशन के पदाधिकारी एन. अग्रवाल बताते हैं कि भोपाल में 700 से अधिक लाइसेंसधारी साहूकार हैं और यह काम पूरी तरह भरोसे पर चलता है। लेकिन बीते कुछ महीनों से वे ऐसे ग्राहकों से दो-चार हो रहे हैं, जो वर्षों बाद आकर अपने जेवरों का हिसाब मांग रहे हैं।

सराफा बाजार में भीड़ तो है, लेकिन खरीदारी कम नजर आ रही है। दुकानों पर तीन तरह के लोग पहुंच रहे हैं—पहले वे, जो बढ़े दामों का फायदा उठाने के लिए अपना घरेलू सोना-चांदी बेचने आए हैं। दूसरे वे, जो मौजूदा जरूरतों के लिए जेवर गिरवी रखना चाहते हैं। और तीसरे, जिनकी संख्या सबसे ज्यादा है, वे लोग जो सालों पहले गिरवी रखे अपने जेवर छुड़ाने पहुंचे हैं।

एक दुकान पर बातचीत के दौरान एक अधेड़ महिला पुराने कपड़े के बैग के साथ पहुंची। उसने कांपते हाथों से बैग खाली किया, जिसमें काले पड़ चुके चांदी के पायल, करधनी और कुछ बर्तन थे। महिला ने बताया कि यह करीब एक किलो आठ सौ ग्राम चांदी है, जिसे वह जरूरत के चलते गिरवी रखने आई है।

ज्वैलरी कारोबारी अभिषेक अग्रवाल बताते हैं कि पिछले कुछ महीनों में 5 से 10 साल पुराने ग्राहक लौट रहे हैं, जिन्होंने कभी ब्याज नहीं चुकाया। जब उन्हें नियम-कानून समझाए जाते हैं, तो वे मानने को तैयार नहीं होते। कई बार रिकॉर्ड मिल जाता है, लेकिन कई मामलों में हिसाब ढूंढना लगभग नामुमकिन हो जाता है।

एक व्यापारी ने बताया कि एक ग्राहक पिछले एक साल में तीन बार आया और हर बार सिर्फ यह हिसाब लगवाता रहा कि जेवर की मौजूदा कीमत कर्ज से कब ज्यादा होगी। जैसे ही उसे फायदा दिखा, वह अंतिम बार आया और पूरा हिसाब चुकाकर जेवर ले गया।

सीहोर के एक मामले में, एक ग्राहक करीब नौ साल बाद लौटा और बढ़ी हुई कीमत का अंतर मांगने लगा, जबकि जेवर पहले ही नियमानुसार गलाए जा चुके थे। व्यापारी ने बताया कि कानूनन उसे कुछ देने की बाध्यता नहीं थी, लेकिन विवाद से बचने और रिश्ते निभाने के लिए उसने रकम लौटा दी।

इस पूरी स्थिति का दूसरा पहलू ग्राहकों की मजबूरी भी दिखाता है। संजय जाटव बताते हैं कि बेटी की शादी के लिए वे पुराना जेवर छुड़ाना चाहते थे, लेकिन इतने सालों का ब्याज जोड़ने पर कर्ज की रकम चांदी की मौजूदा कीमत से भी ज्यादा हो गई। समय सीमा अधिक होने के कारण न तो जेवर बचा और न ही उसका रिकॉर्ड।

मध्यप्रदेश में साहूकारी एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसके तहत लाइसेंस, ब्याज दर, रिकॉर्ड और नीलामी से जुड़े स्पष्ट नियम हैं। वहीं NBFC कंपनियां RBI के कड़े नियमों के तहत काम करती हैं, जहां लोन की अवधि, नीलामी और पारदर्शिता पूरी तरह तय होती है।

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