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Sports Goods Manufacturing: ग्लोबल हब बनने की तैयारी में भारत, 500 करोड़ के बजट से क्या टूटेगी चीन की बादशाहत?

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : भारत अब खेलकूद के सामानों के निर्माण में दुनिया का बड़ा केंद्र बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि आने वाले वर्षों में स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग को नई रफ्तार दी जाएगी और देश को ग्लोबल हब के रूप में स्थापित किया जाएगा।

हैदराबाद से सामने आई जानकारी के अनुसार, भारत सरकार ने स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए बजट में 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके साथ ही नई रणनीतियों पर भी काम किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत को इस क्षेत्र में चीन को सीधी चुनौती देने की स्थिति में ला सकती है।

Sports Goods Manufacturing India: ग्लोबल हब बनने की तैयारी, चीन को चुनौती

देश में आगामी वर्षों में होने वाले बड़े खेल आयोजनों को देखते हुए इस फैसले को अहम माना जा रहा है। साल 2026 में एथलेटिक्स चैंपियनशिप, 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 में ओलंपिक की मेजबानी के लिए भारत ने दावेदारी पेश की है।

खेलों के प्रति युवाओं की बढ़ती रुचि के चलते अब अरबों रुपये के खेल सामान देश में ही तैयार किए जा रहे हैं। इनका निर्यात विदेशों में भी हो रहा है और लाखों लोगों को इससे रोजगार मिल रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने खेलो इंडिया मिशन को और मजबूत करने की बात कही है।

सरकार ने खेल सामग्री की गुणवत्ता और निर्माण को बेहतर बनाने के लिए ‘समर्थ पहल’ का प्रस्ताव भी रखा है। इसके तहत क्रिकेट बैट, हॉकी स्टिक, फुटबॉल, जिम उपकरण समेत कई स्पोर्ट्स आइटम बड़े स्तर पर देश में बनाए जाएंगे। वर्तमान में दुनिया में सबसे ज्यादा स्पोर्ट्स गुड्स चीन बनाता है, जबकि भारत एशिया में तीसरे स्थान पर है।

खेल उद्योग के आंकड़ों पर नजर डालें तो देश की स्पोर्ट्स गुड्स कंपनियों का मौजूदा सालाना टर्नओवर करीब 57 हजार करोड़ रुपये है, जो 2030 तक बढ़कर 90 हजार 420 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। इस उद्योग से करीब 5 लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है।

भारत में स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग की शुरुआत 1883 में सियालकोट से हुई थी। आजादी के बाद यह उद्योग जालंधर और मेरठ में विकसित हुआ, जो आज भी देश के सबसे बड़े स्पोर्ट्स गुड्स हब माने जाते हैं।

दुनिया के कई देशों जैसे चीन, वियतनाम, अमेरिका, जर्मनी, जापान और इटली में भी खेल सामग्री का बड़े स्तर पर उत्पादन होता है। चीन लंबे समय से इस क्षेत्र में नंबर वन एक्सपोर्टर बना हुआ है और 2024 में उसने 1,650 करोड़ रुपये के स्पोर्ट्स इक्विपमेंट का निर्यात किया।

भारत सरकार स्पोर्ट्स गुड्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (SGEPC), मार्केट एक्सेस इनिशिएटिव (MAI) और मार्केट डेवलपमेंट असिस्टेंस (MDA) जैसी योजनाओं के जरिए निर्यातकों को लगातार सहयोग दे रही है।

वर्तमान में भारत एशिया का तीसरा सबसे बड़ा स्पोर्ट्स गुड्स निर्माता है। यहां 318 तरह के खेल सामान बनाए जाते हैं, जिनमें क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल, बॉक्सिंग, फिटनेस और इनडोर गेम्स से जुड़े उपकरण शामिल हैं। इस उद्योग में बड़ी संख्या में महिलाएं और कमजोर वर्ग के लोग भी रोजगार पा रहे हैं।

मेरठ देश का सबसे बड़ा स्पोर्ट्स गुड्स क्लस्टर है, जहां 35 हजार से अधिक यूनिट कार्यरत हैं और देश के कुल निर्यात का 40 प्रतिशत हिस्सा यहीं से जाता है। पंजाब का जालंधर दूसरा बड़ा केंद्र है। दोनों मिलकर देश की 75 से 80 प्रतिशत खेल सामग्री तैयार करते हैं।

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