सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई जमानत की शर्तों के अनुसार कवासी लखमा को छत्तीसगढ़ से बाहर रहना होगा। हालांकि, कोर्ट में पेशी के दौरान उन्हें छत्तीसगढ़ आने की अनुमति होगी। इसके साथ ही उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और अपना वर्तमान पता व मोबाइल नंबर संबंधित पुलिस थाने में दर्ज कराना अनिवार्य किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में लखमा की ओर से एडवोकेट हर्षवर्धन परगनिहा ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि इस मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में करीब ढाई घंटे तक सुनवाई चली, जिसके बाद अदालत ने यह राहत दी।
गौरतलब है कि ED ने कवासी लखमा को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें 7 दिन की रिमांड पर पूछताछ के लिए रखा गया। फिर 21 जनवरी से 4 फरवरी तक न्यायिक रिमांड पर भेजा गया, जिसके बाद से वे रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे।
इधर, कवासी लखमा को अंतरिम जमानत मिलने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दी गई जमानत यह साबित करती है कि सत्य की लड़ाई में संघर्ष जरूर होता है, लेकिन अंततः जीत सत्य की ही होती है।
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