जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार रात जंगल की ओर से कुछ आवारा कुत्ते पार्क के भीतर घुस आए। इसके बाद उन्होंने हिरणों को दौड़ा-दौड़ाकर नो-च-ना शुरू कर दिया। इस हमले में कई हिरण गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनमें से 14 की मौत अगले दिन हो गई, जबकि एक घायल हिरण ने रविवार को दम तोड़ दिया।
घटना की जानकारी शनिवार सुबह मिली, जब कर्मचारी मौके पर पहुंचे तो हालात देख उनके होश उड़ गए। वन विभाग ने तुरंत वेटनरी डॉक्टरों को बुलाकर सभी मृत हिरणों का पोस्टमार्टम कराया और फिर उनका अंतिम संस्कार किया गया।
संजय पार्क अंबिकापुर से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित है और साल 1980 में विकसित किया गया था। यहां पहले 31 हिरण, एक नीलगाय और कई पक्षी मौजूद थे। लेकिन इस घटना के बाद अब सिर्फ 16 हिरण ही बचे हैं।
सरगुजा डीएफओ अभिषेक जोगावत ने बताया कि मरने वाले हिरणों में 5 मादा चीतल, 1 नर चीतल, 5 मादा कोटरा, 1 नर कोटरा और 3 नर चौसिंघा शामिल हैं।
लापरवाही सामने आने के बाद सीसीएफ दिलराज प्रभाकर ने डिप्टी रेंजर समेत 4 कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है। आरोप है कि बाउंड्री का तार टूटा होने के बावजूद इसकी जानकारी समय पर नहीं दी गई।
सस्पेंड किए गए कर्मचारियों में अशोक सिन्हा (डिप्टी रेंजर), ममता परते, प्रतीमा लकड़ा और बिंदू सिंह (वनपाल) शामिल हैं। वहीं रेंजर अक्षपलक ऋषि को नोटिस जारी कर 5 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है।
वन विभाग ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। एसडीओ फॉरेस्ट के नेतृत्व में टीम गठित की गई है, जिसे 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
अब पूरे पार्क को सैनेटाइज करने और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।
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