छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता और सचिव मोती जैन ने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा निजी स्कूलों को दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि लंबे समय से नहीं बढ़ाई गई है। इसी वजह से संगठन ने असहयोग आंदोलन करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग जिला परिवहन अधिकारी कार्यालयों से स्कूल बसों की मांग लगातार की जा रही है। कई सरकारी कार्यक्रमों के लिए निजी स्कूलों से बसें मांगी जाती हैं, लेकिन जब तक प्रतिपूर्ति राशि में बढ़ोतरी नहीं होती, तब तक स्कूल बसें उपलब्ध कराना संभव नहीं होगा।
रायपुर में आयोजित बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई। एसोसिएशन के मुताबिक शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों को मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि पिछले 13 वर्षों से नहीं बढ़ाई गई है। इस मामले को लेकर संगठन ने उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका भी दायर की थी।
सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने अपने अंतिम आदेश में राज्य सरकार को छह महीने के भीतर मांगों पर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अब तक इस दिशा में कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है।
एसोसिएशन की मांग है कि आरटीई के तहत दी जाने वाली राशि में बढ़ोतरी की जाए। प्राथमिक कक्षाओं के लिए प्रति विद्यार्थी प्रति वर्ष 7,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये, माध्यमिक कक्षाओं के लिए 11,500 रुपये से बढ़ाकर 22,000 रुपये और हाई व हायर सेकेंडरी कक्षाओं के लिए अधिकतम सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने की मांग रखी गई है।
इसके साथ ही संगठन ने यह भी आग्रह किया है कि बढ़ी हुई राशि को पिछले तीन वर्षों से लागू किया जाए। एसोसिएशन का कहना है कि गरीब विद्यार्थियों की शिक्षा पर होने वाले खर्च को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग संवेदनशील नहीं दिख रहा है और अदालत के आदेशों की भी अनदेखी हो रही है।
प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक 1 मार्च को आयोजित की गई थी। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जब तक आरटीई प्रतिपूर्ति राशि में बढ़ोतरी नहीं की जाती, तब तक प्रदेश के सभी निजी स्कूल असहयोग आंदोलन जारी रखेंगे।
एसोसिएशन ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि विभिन्न जिला परिवहन अधिकारी कार्यालयों से कार्यक्रमों के लिए बसों की मांग की जा रही है, लेकिन मौजूदा हालात में इन मांगों को पूरा करना संभव नहीं होगा।
असहयोग आंदोलन के तहत निजी स्कूलों ने यह भी निर्णय लिया है कि स्कूल शिक्षा विभाग के किसी भी कार्य में सहयोग नहीं किया जाएगा। विभाग की ओर से जारी किसी भी पत्र, नोटिस या आदेश का जवाब भी फिलहाल नहीं दिया जाएगा।
संगठन का कहना है कि जब तक प्रतिपूर्ति राशि को प्रस्तावित स्तर तक नहीं बढ़ाया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
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