सरगुजा, कांकेर समेत कई जिलों से पहुंचे इन विद्यामितानों ने कहा कि वे सालों से नियमित शिक्षकों की तरह ही जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। कक्षा शिक्षण से लेकर आईसीटी प्रशिक्षण, चुनाव ड्यूटी, एनएसएस, बोर्ड परीक्षा और कॉपी जांच तक सभी काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें न तो स्थायी दर्जा मिला है और न ही समान वेतन।
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प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट रहा। मंत्री निवास के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था, जिसमें तीन थाना प्रभारियों की मौजूदगी रही। हालांकि पूरा प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से हुआ और शिक्षकों ने अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।
शिक्षकों ने बताया कि हाल ही में विधानसभा में अतिथि शिक्षकों को हटाने की चर्चा से उनके बीच चिंता बढ़ गई थी। इसी कारण वे सीधे मंत्री निवास पहुंचे और सरकार से स्थिति साफ करने की मांग की।
प्रदर्शन के बाद शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने शिक्षकों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। मंत्री ने साफ कहा कि अतिथि शिक्षकों को हटाने का कोई फैसला नहीं लिया गया है और उनकी बातें बेबुनियाद हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर रही है।
शिक्षकों के मुताबिक, मंत्री ने यह भी कहा कि मानदेय का निर्धारण पात्रता के आधार पर किया जाएगा और इस पूरे मामले पर कैबिनेट में चर्चा होगी। कैबिनेट बैठक के बाद ही भविष्य को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
अतिथि शिक्षकों ने अपनी प्रमुख मांगों में संविलियन, ग्रीष्मकालीन अवधी का मानदेय, समान काम के बदले समान वेतन और सरकारी कर्मचारियों जैसी छुट्टियों की सुविधा शामिल बताई। उन्होंने बिलासपुर हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि कोर्ट भी इस दिशा में निर्देश दे चुका है।
वर्षों से अस्थायी रूप से काम कर रहे शिक्षकों ने उम्मीद जताई है कि अब उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक फैसला लिया जाएगा।
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