जानकारी के मुताबिक, करीब 25 लाख के इनामी पापा राव अपने 17 साथियों के साथ ह थि या रों सहित जंगल से बाहर निकल चुका है। उसे सुरक्षित बाहर लाने के लिए सुरक्षा बलों की विशेष टीम इंद्रावती नेशनल पार्क के भीतर पहुंच चुकी है। अगर यह सरेंडर सफल होता है, तो इसे बस्तर में मा ओ वा दी गतिविधियों के अंत की बड़ी शुरुआत माना जा रहा है।
पिछले कुछ सालों में सुरक्षा बलों ने लगातार ऑपरेशन चलाकर मा ओ वा दी नेटवर्क को बड़ा झटका दिया है। बसव राजू, गुडसा उसेंडी, कोसा, हिड़मा और सुधाकर जैसे बड़े नाम खत्म होने के बाद संगठन पहले ही कमजोर हो चुका था। वहीं, भूपति, देवजी, मल्लाजी रेड्डी, रुपेश और सुजाता सहित करीब 2700 मा ओ वा दी पहले ही सरेंडर कर चुके हैं। अब बस्तर में करीब 50 ही सक्रिय बताए जा रहे हैं।
इधर, गांवों में विकास कार्यों ने भी हालात पूरी तरह बदल दिए हैं। जहां कभी जनताना सरकार का प्रभाव था, वहां अब सड़क, स्कूल, अस्पताल और सुरक्षा कैंप बन चुके हैं। सरकारी योजनाओं और रोजगार के अवसरों ने युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ दिया है, जिससे मा ओ वा दी समर्थन लगभग खत्म हो गया है।
हालांकि, झारखंड अब भी एक चुनौती बना हुआ है। वहां पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा अपने 70-80 साथियों के साथ सक्रिय बताया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों को उसकी लोकेशन का अंदाजा है, लेकिन इलाके में बिछाए गए ब म और सुरंगों के कारण ऑपरेशन आसान नहीं है।
केंद्रीय गृहमंत्री द्वारा तय समय सीमा के बीच तेजी से बदलते हालात सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता माने जा रहे हैं। पापा राव का संभावित सरेंडर इस दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।
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