हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया मनाई जाती है। यह दिन इतना शुभ माना जाता है कि इसे अबूझ मुहूर्त कहा जाता है, यानी बिना पंचांग देखे भी कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है। इस दिन किए गए हर अच्छे कार्य का फल अक्षय यानी कभी न खत्म होने वाला होता है।
पूजा की सरल विधि:
अक्षय तृतीया के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। अगर गंगा स्नान संभव न हो तो घर में गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी शुभ माना गया है। इसके बाद साफ और पीले या शुभ रंग के कपड़े पहनें।
घर में एक स्वच्छ स्थान पर चौकी रखकर उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और मां लक्ष्मी व भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें। गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें और कुमकुम-चंदन लगाएं।
मां लक्ष्मी को लाल फूल, कमल अर्पित करें और भगवान विष्णु को तुलसी जरूर चढ़ाएं। इसके बाद धूप-दीप जलाकर फल, मिठाई और पान-सुपारी का भोग लगाएं। विशेष रूप से केसरिया भात, खीर या सफेद मिठाई अर्पित करना शुभ माना गया है।
पूजा के अंत में आरती करें और मंत्रों का जाप करते हुए श्रद्धा के साथ पूजा संपन्न करें।
पूजा का शुभ मुहूर्त (2026):
तृतीया तिथि शुरू – 19 अप्रैल 2026, सुबह 10:49 बजे
तृतीया तिथि समाप्त – 20 अप्रैल 2026, सुबह 07:27 बजे
पूजा मुहूर्त – सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:38 बजे तक
अभिजित मुहूर्त – दोपहर 12:12 बजे से 01:03 बजे तक
सोना खरीदने का समय – सुबह 10:49 बजे से अगले दिन सुबह 06:18 बजे तक
क्या खरीदना शुभ होता है?
इस दिन सोना खरीदना सबसे शुभ माना जाता है। अगर संभव न हो तो चांदी, मिट्टी का घड़ा, जौ, कौड़ी, कमलगट्टा या दक्षिणावर्ती शंख खरीद सकते हैं।
धार्मिक महत्व:
मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। भगवान परशुराम का जन्म भी इसी दिन माना जाता है। महाभारत की रचना की शुरुआत भी इसी तिथि से हुई थी। इसके अलावा त्रेता युग का प्रारंभ और कृष्ण-सुदामा का मिलन भी इसी दिन से जुड़ा हुआ है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान सूर्य ने पांडवों को अक्षय पात्र दिया था, जिससे भोजन कभी समाप्त नहीं होता था।
ज्योतिषीय महत्व:
ज्योतिष के अनुसार, इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों उच्च अवस्था में होते हैं। यह दुर्लभ संयोग जीवन में सुख-समृद्धि और मानसिक शांति देने वाला माना जाता है। इसलिए इस दिन नए काम शुरू करना, खरीदारी करना और पूजा-पाठ करना बेहद शुभ माना गया है।
अंतिम बात:
अक्षय तृतीया सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर है। सच्चे मन से की गई पूजा आपके जीवन में खुशहाली और समृद्धि ला सकती है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। भिलाई की पत्रिका न्यूज़ एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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