स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तरफ जल संकट है, तो दूसरी तरफ जो पानी मिल रहा है, वह पूरी तरह दूषित है। हालत यह है कि इस पानी का किसी भी काम में इस्तेमाल करना संभव नहीं है।
रहवासियों ने बताया कि इस समस्या की शिकायत कई बार निगम आयुक्त और कलेक्टर से की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
खुर्सीपार के रहने वाले गोपाल के अनुसार, यह इलाका औद्योगिक क्षेत्र है, जहां कंपनियां अपने वेस्ट का सही तरीके से निपटान नहीं कर रही हैं। यही केमिकल युक्त गंदा पानी भूजल में मिल रहा है, जिससे बोरिंग का पानी भी खराब हो चुका है।
कई जगहों पर पानी में डामर और तेल जैसी परत साफ दिखाई दे रही है। इस वजह से लोगों में किडनी और हृदय से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ने लगा है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो यह समस्या बड़ी स्वास्थ्य आपदा बन सकती है।
इससे पहले गौतम नगर और सेक्टर-7 में पीलिया और डायरिया के मामले सामने आ चुके हैं, जिससे लोगों में डर का माहौल बना हुआ है।
वर्तमान में हजारों लोग इस समस्या से प्रभावित हैं और पीने के पानी के लिए टैंकर या बाजार से पानी खरीदने को मजबूर हैं।
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