बुधवार को हुई साय कैबिनेट की बैठक में फैसला लिया गया कि UCC लागू करने के लिए रिटायर्ड जज रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जाएगी। यह कमेटी आम नागरिकों, विभिन्न संगठनों और एक्सपर्ट्स से सुझाव लेकर एक ड्राफ्ट तैयार करेगी। इसके बाद इस ड्राफ्ट को विधानसभा में पेश किया जाएगा।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट भी यह कह चुका है कि देश में समान नागरिक संहिता लागू करने का समय आ गया है। हालांकि, इस पर अंतिम फैसला लेना संसद का अधिकार है।
राज्य सरकार का कहना है कि अभी छत्तीसगढ़ में शादी, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने, भरण-पोषण और पारिवारिक विवाद जैसे मामलों में अलग-अलग धर्मों के अलग कानून लागू हैं। इससे न्याय प्रक्रिया जटिल हो जाती है। UCC लागू करने का उद्देश्य कानून को सरल बनाना और सभी के लिए समान नियम सुनिश्चित करना है।
देश में फिलहाल केवल उत्तराखंड में UCC लागू किया गया है, जहां 28 जनवरी 2025 से यह कानून लागू हुआ। इसके तहत शादी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है और तय समय में रजिस्ट्रेशन नहीं होने पर जुर्माने का प्रावधान है।
साथ ही शादी की न्यूनतम उम्र लड़कों के लिए 21 साल और लड़कियों के लिए 18 साल तय की गई है। सभी समुदायों के लिए शादी और तलाक के नियम समान रखे गए हैं। लिव-इन रिलेशनशिप में भी रजिस्ट्रेशन जरूरी किया गया है और धोखाधड़ी की स्थिति में सजा का प्रावधान है। इसके अलावा संपत्ति में बेटा-बेटी को बराबर अधिकार दिए गए हैं।
वहीं, गुजरात विधानसभा में भी हाल ही में UCC विधेयक 2026 पास किया गया है, जबकि गोवा में पहले से ही पुर्तगाली सिविल कोड 1867 के चलते समान नागरिक संहिता लागू है।अब छत्तीसगढ़ में भी इस दिशा में कदम बढ़ने से लोगों की नजरें आने वाले फैसलों पर टिक गई हैं।
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) – इमेज के मुख्य पॉइंट्स:
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आमतौर पर हर देश में दो तरह के कानून होते हैं:
➤ क्रिमिनल कानून
➤ सिविल कानून -
क्रिमिनल कानून में चोरी, लूट, मार-पीट, ह*त्या जैसे मामलों की सुनवाई होती है
➤ इसमें सभी धर्मों के लिए एक समान प्रक्रिया और सजा का प्रावधान होता है - सिविल कानून में शादी, तलाक, संपत्ति, गोद लेने और परिवार से जुड़े मामले आते हैं
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भारत में सिविल मामलों में अलग-अलग धर्मों के लिए अलग पर्सनल लॉ लागू हैं
➤ जैसे हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और सिख समुदाय के अपने-अपने नियम - पर्सनल लॉ में रीति-रिवाज, संस्कृति और परंपराओं का खास महत्व होता है
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यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का उद्देश्य:
➤ सभी पर्सनल लॉ खत्म करके एक समान कानून लागू करना
➤ हर नागरिक के लिए समान नियम, चाहे धर्म या जाति कुछ भी हो -
उदाहरण:
➤ मुस्लिम पर्सनल लॉ में पुरुष को 4 शादी की अनुमति
➤ हिंदू मैरिज एक्ट में दूसरी शादी अपराध मानी जाती है -
UCC लागू होने पर:
➤ सभी धर्मों के लिए एक जैसा नियम लागू होगा
➤ शादी, तलाक और संपत्ति के मामलों में समान कानून होगा
साय कैबिनेट के 9 बड़े फैसले (15-04-2026):
- UCC के लिए कमेटी का गठन
- महिलाओं को जमीन रजिस्ट्री में 50% छूट
- पूर्व सैनिकों को संपत्ति खरीद में स्टाम्प ड्यूटी में 25% छूट
- औद्योगिक भूमि नियमों में संशोधन
- रेत खदानों को लेकर नया प्रावधान
- अवैध खनन पर 25 हजार से 5 लाख तक जुर्माना तय
- दुग्ध पशु योजना में संशोधन
- पशुओं के टीकों की समय पर उपलब्धता
- मध्यप्रदेश से 10,536 करोड़ रुपए की राशि वापसी पर सहमति
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