करीब 5 साल की देरी के बाद शुरू हुई यह जनगणना 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 तक चलेगी। पहले चरण में मकानों की गिनती यानी ‘हाउस लिस्टिंग’ होगी। इसके बाद फरवरी 2027 में दूसरा चरण आएगा, जिसमें जनसंख्या और जाति से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी।
इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। कर्मचारी मोबाइल ऐप के जरिए सीधे आपके घर की जानकारी स्मार्टफोन में दर्ज करेंगे। ‘जियो-रेफरेंसिंग’ तकनीक के जरिए हर घर की लोकेशन मैप पर दर्ज की जाएगी, ताकि कोई भी घर छूटे नहीं।
जनगणना के दौरान आपसे कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे। इसमें घर की बनावट, फर्श-दीवार-छत का मटेरियल, परिवार के मुखिया का नाम, लिंग और समुदाय, घर का मालिकाना हक, पानी-बिजली जैसी सुविधाएं और वाहन की जानकारी शामिल होगी। साथ ही परिवार के खान-पान और घर में रहने वाले विवाहित जोड़ों की संख्या भी पूछी जाएगी, जहां लिव-इन कपल्स को भी शादीशुदा माना जाएगा।
लेकिन ध्यान रखें, हर सवाल का जवाब देना जरूरी नहीं है , इन सवालों के जवाब देने से बचे-
1) अगर कोई कर्मचारी आपकी आमदनी, बैंक बैलेंस या कमाई से जुड़ा सवाल
2) आधार, पैन या किसी भी पहचान पत्र को दिखाने का दबाव डाला जाए, तो यह जरूरी नहीं है।
3) बैंक खाता नंबर, ओटीपी जैसी निजी जानकारी
कुछ नियमों में भी बदलाव हुआ है। मोबाइल में FM होने पर उसे रेडियो माना जाएगा, लेकिन मोबाइल पर वीडियो देखना टीवी नहीं माना जाएगा। ट्रैक्टर को कार या जीप की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा। अगर घर में अलग से किचन नहीं है, तो उसे रसोई नहीं माना जाएगा।
यह जनगणना देश की भविष्य की योजनाओं की नींव मानी जा रही है। इसलिए सही जानकारी देना जरूरी है, लेकिन अपनी निजी जानकारी को सुरक्षित रखना भी उतना ही अहम है।
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