गुरुवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने यह अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करना होगा।
सुनवाई के दौरान रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अदालत को बताया कि उनके पिता की हत्*या एक राजनीतिक साजिश का हिस्सा थी। इस मामले में CBI ने करीब 11 हजार पन्नों की चार्जशीट पेश की थी, जिसमें कई अहम सबूत शामिल थे। इन्हीं तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने यह फैसला सुनाया।
इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने अमित जोगी को बरी कर दिया था, लेकिन बाद में इस मामले को दोबारा खोला गया। अब हाईकोर्ट ने उस फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी ठहराया है।
फैसले के बाद अमित जोगी ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बिना पर्याप्त सुनवाई का मौका दिए निर्णय लिया गया है, जो उनके लिए अप्रत्याशित है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद सुप्रीम कोर्ट से है।
वहीं सतीश जग्गी ने इस फैसले को परिवार के लिए न्याय बताया। उन्होंने कहा कि 23 साल की लंबी लड़ाई के बाद आज इंसाफ मिला है। उन्होंने हाईकोर्ट का आभार जताते हुए कहा कि अगर अमित जोगी सुप्रीम कोर्ट जाते हैं तो वहां भी वे अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे।
सतीश जग्गी ने भावुक होते हुए बताया कि एक दिन पहले उनकी मां ने फोन कर आशीर्वाद दिया था और कहा था कि हनुमान जयंती पर न्याय मिलेगा, और आज वही सच साबित हुआ।
गौरतलब है कि रामावतार जग्गी, जो NCP नेता थे, उनकी 4 जून 2003 को रायपुर में गोली मारकर हत्*या कर दी गई थी। इस केस में कुल 31 आरोपी थे, जिनमें से 2 सरकारी गवाह बन गए थे और बाकी 28 को सजा मिली थी। अमित जोगी को पहले बरी किया गया था, जिसके खिलाफ सतीश जग्गी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को फिर से सुनवाई के लिए बिलासपुर हाईकोर्ट भेजा था, जहां अब यह बड़ा फैसला आया है।
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