इस आयोजन में 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के करीब 3,800 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। नौ अलग-अलग खेलों में मुकाबले हुए, जिनमें 106 स्वर्ण पदक दांव पर थे। तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, भारोत्तोलन और कुश्ती मुख्य खेल रहे, जबकि मल्लखंभ और कबड्डी प्रदर्शन खेलों के रूप में शामिल किए गए।
कर्नाटक ने कुल 23 स्वर्ण, 8 रजत और 7 कांस्य पदक जीतकर पहला स्थान हासिल किया। वहीं ओडिशा 21 स्वर्ण, 15 रजत और 21 कांस्य के साथ दूसरे स्थान पर रहा और 57 पदकों के साथ सबसे ज्यादा पदक जीतने वाला दल बना। झारखंड 16 स्वर्ण, 8 रजत और 11 कांस्य के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
मेजबान छत्तीसगढ़ ने भी दमदार खेल दिखाया। टीम ने 3 स्वर्ण, 10 रजत और 6 कांस्य पदक जीतकर नौवां स्थान हासिल किया। आखिरी दिन पुरुष फुटबॉल फाइनल में छत्तीसगढ़ को पश्चिम बंगाल के खिलाफ 0-1 से हार का सामना करना पड़ा, जिससे उन्हें रजत पदक मिला।
कर्नाटक ने शुरुआत से ही बढ़त बना ली थी, खासकर तैराकी में उनका प्रदर्शन शानदार रहा, जहां उन्होंने 15 स्वर्ण पदक जीते। इसके अलावा एथलेटिक्स में 5 और कुश्ती में 3 स्वर्ण पदक जोड़कर उन्होंने अपनी बढ़त को कायम रखा।
व्यक्तिगत प्रदर्शन की बात करें तो कर्नाटक के मणिकांत एल सबसे सफल खिलाड़ी रहे, जिन्होंने 8 स्वर्ण और 1 रजत पदक जीते। वहीं धोनिश एन ने तैराकी में 5 स्वर्ण और 1 रजत अपने नाम किया। महिला वर्ग में ओडिशा की अंजलि मुंडा ने 5 स्वर्ण पदक जीते, जबकि कर्नाटक की मेघांजलि ने 4 स्वर्ण और 2 कांस्य पदक हासिल किए।
ओडिशा की टीम ने सभी छह खेलों में कम से कम एक स्वर्ण पदक जीतकर संतुलित प्रदर्शन किया। वहीं झारखंड ने एथलेटिक्स, कुश्ती और तीरंदाजी में बेहतरीन खेल दिखाया।
अंतिम दिन तीरंदाजी में मुकाबले हुए, जहां ओडिशा के अर्जुन खारा ने पुरुष रिकर्व व्यक्तिगत वर्ग में स्वर्ण जीता। वहीं झारखंड की कोमालिका बारी ने महिला वर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। नागालैंड ने महिला टीम में स्वर्ण जीता।
कुल मिलाकर 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने पदक तालिका में जगह बनाई, जिनमें से 20 ने कम से कम एक स्वर्ण पदक जीता। यह देशभर में खेल प्रतिभा के फैलाव को दिखाता है। महाराष्ट्र चौथे और अरुणाचल प्रदेश पांचवें स्थान पर रहे।
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