मंजूरी मिलने वाले मेडिकल कॉलेज गीदम (दंतेवाड़ा), कुनकुरी (जशपुर), मनेन्द्रगढ़, जांजगीर-चांपा और कबीरधाम में स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक कॉलेज में 50-50 एमबीबीएस सीटें होंगी। इस तरह कुल 250 नई सीटें प्रदेश के छात्रों के लिए उपलब्ध होंगी। इनमें से कई क्षेत्र पहले नक्सल प्रभावित रहे हैं और लंबे समय से स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी महसूस करते रहे हैं। अब इन कॉलेजों से डॉक्टर तैयार होने के साथ स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी।
उन्होंने विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का जिक्र करते हुए कहा कि बिना तैयारी के आवेदन करने और सरकारी धन बर्बाद होने की बातें कही जा रही थीं। मंत्री ने कहा कि उन्होंने पहले भी कहा था कि "मैच खत्म होने से पहले परिणाम नहीं निकाला जाना चाहिए।" अब मैच खत्म हो गया है और परिणाम सबके सामने है।
स्वास्थ्य मंत्री ने इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने इसे डबल इंजन सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया।
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उन्होंने कहा कि यह चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास की दिशा में ऐतिहासिक पड़ाव है। राज्य सरकार का लक्ष्य ऐसा मजबूत, समावेशी और आधुनिक स्वास्थ्य तंत्र तैयार करना है, जहां कोई भी युवा डॉक्टर बनने के अपने सपने से वंचित न रहे और किसी नागरिक को बेहतर इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर न जाना पड़े।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि गीदम (दंतेवाड़ा), कुनकुरी (जशपुर), मनेन्द्रगढ़, जांजगीर-चांपा और कबीरधाम जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि डबल इंजन सरकार विकास के अवसरों को अंतिम छोर तक पहुंचाने का काम कर रही है। ये मेडिकल कॉलेज केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं होंगे, बल्कि अनुसंधान, विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं और स्थानीय मानव संसाधन विकास के प्रमुख केंद्र भी बनेंगे।
मेडिकल सीटों के विस्तार से प्रदेश के युवाओं को घर के पास गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा मिलेगी। वहीं विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार आने की उम्मीद है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कदम डॉक्टरों की कमी दूर करने के साथ क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में भी मददगार साबित होगा।
छत्तीसगढ़ के लिए यह केवल आंकड़ों का विस्तार नहीं, बल्कि युवाओं की आकांक्षाओं को नई उड़ान देने वाला कदम माना जा रहा है। गीदम के जंगलों से लेकर जशपुर के पहाड़ों तक अब डॉक्टर बनने का सपना और भी करीब नजर आने लगा है। 2026-27 सत्र से शुरू होने वाली यह पहल प्रदेश को स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान दिला सकती है|
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ऑफिस से लौटते हुए राहुल ने जैसे ही कमरे का दरवाज़ा खोला,
उसे वही पुरानी घुटन महसूस हुई—एक छोटा सा कमरा,
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रात के करीब 11:30 बजे थे।
बाहर हल्की-हल्की बारिश हो रही थी। कमरे में सिर्फ एक ट्यूबलाइट..
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