भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : अहमदाबाद।
12 जून 2025 को हुए एयर इंडिया प्लेन हादसे में जिंदा बचे अकेले शख्स विश्वास कुमार रमेश आज गहरे दर्द और अकेलेपन में जी रहे हैं। यह वही हादसा था जिसमें 241 लोगों की जान चली गई, लेकिन चमत्कारिक रूप से विश्वास रमेश बच निकले। अब वही ज़िंदा बचे शख्स अपने ही घर में खामोश हैं — न पत्नी से बात करते हैं, न बेटे से।
रमेश अब मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं भाग्यशाली तो हूं कि बच गया, लेकिन अंदर से बिल्कुल टूट चुका हूं।” हादसे की वो दर्दनाक यादें उन्हें चैन नहीं लेने देतीं।
भाई की मौत ने तोड़ दिया रमेश को
विश्वास के भाई की भी मौत उसी विमान में हो गई थी, जो उनसे कुछ सीट दूर बैठे थे। उन्होंने कहा, “मेरा भाई मेरी रीढ़ था। उसने हर मुश्किल में मेरा साथ दिया। आज वो नहीं है, और मैं एकदम अकेला हूं।”बीबीसी को दिए इंटरव्यू में विश्वास बोले, “मैं जिंदा हूं, पर यकीन नहीं होता कि बच गया। ये किसी चमत्कार से कम नहीं, लेकिन अब मैं टूट चुका हूं।”
परिवार से दूरी और मानसिक पीड़ा
हादसे के बाद से ही विश्वास पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) से जूझ रहे हैं। वो कहते हैं, “अब मैं किसी से बात नहीं करना चाहता। मैं अपने कमरे में अकेला बैठता हूं। मां रोज दरवाजे पर बैठी रहती हैं, लेकिन मुझसे कुछ नहीं कहतीं। पूरा परिवार दर्द में है।”
उन्होंने कहा, “अब किसी से बात करना पसंद नहीं। सारी रात सोचता रहता हूं... नींद नहीं आती। मेरा शरीर और मन दोनों थक चुके हैं।”
शारीरिक चोटें और टूटता हौसला
हादसे के वक्त 11A सीट से बाहर निकलते समय उन्हें कई जगह गंभीर चोटें आईं। उनके कंधे, घुटने और पीठ में लगातार दर्द रहता है। चलना मुश्किल हो गया है और अब वे गाड़ी भी नहीं चला पाते। उनकी पत्नी धीरे-धीरे उन्हें संभालती हैं, लेकिन जीवन अब पहले जैसा नहीं रहा।
दीव में बंद हुआ पारिवारिक व्यवसाय
विश्वास रमेश का दीव में पारिवारिक मछली पकड़ने का व्यवसाय था, जिसे वे अपने भाई के साथ चलाते थे। हादसे के बाद से यह काम पूरी तरह बंद पड़ा है।
रमेश के सहयोगी संजीव पटेल कहते हैं, “वे मानसिक, शारीरिक और आर्थिक संकट में हैं। यह बहुत दुखद है कि एयर इंडिया के अधिकारी इस स्थिति पर खामोश हैं।”
एयर इंडिया का मुआवजा और परिवार की उम्मीदें
टाटा समूह की एयर इंडिया ने रमेश को 21,500 पाउंड (लगभग 25.09 लाख रुपये) का अंतरिम मुआवजा दिया है। कंपनी के अधिकारी परिवार से मिलकर शोक संवेदना व्यक्त कर चुके हैं। हालांकि, रमेश के साथियों का कहना है कि यह राशि उनके जीवन को पटरी पर लाने के लिए काफी नहीं है।
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