छत्तीसगढ़ में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के नियम बदले: एक साल बाद बनवाने के लिए मजिस्ट्रेट से लेनी होगी मंजूरी..

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : छत्तीसगढ़ में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र को लेकर बड़े बदलाव किए गए हैं, जिससे अब देर से आवेदन करने वालों के लिए प्रक्रिया बदल जाएगी। राज्य सरकार ने नए नियम लागू कर दिए हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा।

नए प्रावधान के अनुसार, अगर जन्म या मृत्यु के एक साल से अधिक समय बीत चुका है तो प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अब न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास आवेदन करना होगा। मजिस्ट्रेट जांच करवाकर आदेश जारी करेंगे, तभी उप पंजीयक प्रमाण पत्र देगा। पहले यह काम कलेक्टर द्वारा अधिकृत अधिकारी कर देता था।

मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गोद लिए गए बच्चों का भी जन्म प्रमाण पत्र बनाया जाएगा। इसके लिए तीन अलग-अलग आवेदन तैयार किए गए हैं, जिनमें दत्तक माता-पिता को आधार नंबर से लेकर पते तक की जानकारी देनी होगी।

सरकार ने मृत जन्म प्रमाण पत्र बनाने का भी नियम लागू किया है। यानी अगर कोई बच्चा जन्म के समय मृत पैदा होता है, तो माता-पिता उसका भी प्रमाण पत्र बनवा सकेंगे। छत्तीसगढ़ राज्य जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण 2026 के तहत 19 नियम बनाए गए हैं, जिसमें गर्भावधि की न्यूनतम अवधि 28 सप्ताह तय की गई है।

नए फॉर्म में जन्म देने वाली मां की शिक्षा की जानकारी भी देनी होगी। इसके लिए पूर्व प्राथमिक से लेकर डॉक्टरेट तक 20 कॉलम बनाए गए हैं। साथ ही माता-पिता के व्यवसाय की जानकारी भी मांगी जाएगी, जिसमें कृषक, कृषि मजदूर, दैनिक वेतन भोगी, पारिवारिक कार्यकर्ता, नियोक्ता, सरकारी कर्मचारी, निजी कर्मी, घरेलू सहायक और गैर कार्यकर्ता जैसे 9 विकल्प शामिल हैं। मृत्यु प्रमाण पत्र में भी मरने वाले व्यक्ति से जुड़ी यह जानकारी ली जाएगी। अब यह बताना भी जरूरी होगा कि बच्चे का जन्म कितने सप्ताह में हुआ।

अगर किसी चलती गाड़ी में बच्चे का जन्म होता है, तो जहां वाहन सबसे पहले रुकेगा वहीं को जन्मस्थान माना जाएगा और वहीं से प्रमाण पत्र बनेगा। इस स्थिति में वाहन चालक गवाह होगा। इसी तरह चलते वाहन में मृत्यु होने पर भी जहां वाहन रुकेगा, वहीं से प्रमाण पत्र जारी होगा और एक्सीडेंट की स्थिति में समीक्षा अधिकारी की जानकारी के आधार पर सर्टिफिकेट बनाया जाएगा।

काम की बात यह है कि जन्म या मृत्यु के 21 दिन के भीतर पंजीयक के पास आवेदन करने पर 30 दिन में प्रमाण पत्र मिल सकता है। 21 दिन से अधिक और एक साल तक की देरी होने पर कलेक्टर द्वारा अधिकृत अधिकारी प्रमाण पत्र जारी करेगा, जबकि एक साल से ज्यादा देरी होने पर न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास आवेदन करना अनिवार्य होगा।

यदि किसी बच्चे का पंजीयन बिना नाम के हुआ है, तो माता-पिता को एक साल के अंदर रजिस्ट्रार को मौखिक या लिखित रूप से नाम की सूचना देनी होगी। एक साल बाद नाम दर्ज कराने पर 250 रुपए विलंब शुल्क देना पड़ेगा। आवेदन के 30 दिन के भीतर अधिकारी को प्रमाण पत्र जारी करना होगा, और तय समय में जारी न होने पर अगले 15 दिनों में डाक से भेजना होगा।

सरकार ने विलंब शुल्क भी तय कर दिया है। 21 दिन की समय सीमा गुजरने के बाद 30 दिन के भीतर आवेदन करने पर 20 रुपए शुल्क लगेगा। 30 दिन से अधिक और एक साल से कम में जिला रजिस्ट्रार के पास आवेदन करने पर 50 रुपए देने होंगे। वहीं एक साल से ज्यादा देरी होने पर न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास आवेदन करते समय 100 रुपए शुल्क देना होगा।

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