भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : नए साल की शुरुआत होते ही हर घर में एक ही चर्चा होती है—खर्च कैसे कम हो और बचत कैसे बढ़े। इरादे तो मजबूत होते हैं, लेकिन साल खत्म होते-होते हालात फिर वही पुराने नजर आते हैं। वजह साफ है, धन प्रबंधन अभी भी भावनाओं से चलता है, किसी तय व्यवस्था से नहीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक खर्च और बचत का एक सरल और अनुशासित ढांचा नहीं बनाया जाता, तब तक संकल्प सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाते हैं। अगर बचत के साथ पैसा बढ़ाना है, तो योजना भी उतनी ही मजबूत होनी चाहिए।
खर्च पर नियंत्रण के लिए योजना बनाना जरूरी
हर छोटे-बड़े खर्च का हिसाब रखना आसान नहीं होता। इसका बेहतर तरीका है कि आय को पहले ही चार हिस्सों में बांट दिया जाए—
40% रोजमर्रा की जरूरतों के लिए,
30% भविष्य की बचत और निवेश के लिए,
15% मनोरंजन और शौक के लिए,
और 15% आपातकालीन निधि के लिए।
रोजमर्रा के खर्च को संभालने के लिए मोबाइल वॉलेट का उपयोग किया जा सकता है। इससे दैनिक खर्च की एक सीमा तय हो जाती है और दिन के अंत में बचा पैसा अपने आप बचत बन जाता है।
बचत को उद्देश्य देना है जरूरी
बड़ी रकम बचाने का लक्ष्य अक्सर डर पैदा करता है। इसके बजाय खर्च के अनुपात में बचत की आदत डालना ज्यादा असरदार होता है। साथ ही, हर बचत को एक नाम दें—जैसे आपातकाल, शिक्षा, यात्रा या सुरक्षा फंड। जब पैसे का उद्देश्य साफ होता है, तो उसे बिना जरूरत खर्च करना मुश्किल हो जाता है।
नियमित समीक्षा से बचेंगे नुकसान
महंगे और तुरंत किए गए खर्च बाद में परेशानी बढ़ा सकते हैं। ऐसे हर फैसले को कम से कम 24 घंटे का समय देना अनावश्यक खरीदारी से बचाता है। महीने-दर-महीने उलझने के बजाय तिमाही समीक्षा ज्यादा कारगर साबित होती है। जब धन योजना को बोझ नहीं, बल्कि एक अच्छी आदत की तरह अपनाया जाता है, तो अनुशासन अपने आप आ जाता है।
बचत के साथ निवेश के नए विकल्प
बचाई गई राशि को सही जगह निवेश करना भी उतना ही जरूरी है। इसके लिए कुछ सुरक्षित और समझदारी भरे विकल्प मौजूद हैं।
टारगेट मैच्योरिटी बॉन्ड फंड ऐसे म्यूचुअल फंड होते हैं, जो तय समय के लिए सरकारी या सरकारी कंपनियों से जुड़े साधनों में निवेश करते हैं। इनमें जोखिम कम होता है और निवेशक को पहले से पता होता है कि पैसा कब मिलेगा। यह विकल्प उन लोगों के लिए सही है, जो सुरक्षित और स्थिर रिटर्न चाहते हैं।
थीम आधारित इंटरनेशनल ईटीएफ में पैसा दुनिया भर की चुनिंदा थीम पर काम करने वाली कंपनियों में लगाया जाता है, जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी या हेल्थ सेक्टर। इससे निवेश सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहता और जोखिम बंट जाता है।
फैक्टर आधारित इंडेक्स फंड शेयर बाजार के खास गुणों पर आधारित होते हैं, जैसे कम उतार-चढ़ाव वाले शेयर या मजबूत गुणवत्ता वाली कंपनियां। ये तय नियमों पर चलते हैं, जिससे भावनाओं में बहकर गलत फैसले लेने की संभावना कम हो जाती है।
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