जानकारी के मुताबिक, कई स्टूडेंट्स ने स्वीकार किया है कि उन्हें टेलीग्राम के जरिए पेपर मिला था, जिसे अलग-अलग स्टडी ग्रुप्स में शेयर किया गया। इस मामले में FIR दर्ज कर ली गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है।
दरअसल, मंत्री गजेन्द्र यादव ने एक बयान में कहा था कि छात्र संगठन पेपर लीक को लेकर भ्रम फैला रहे हैं। इस बयान के बाद NSUI कार्यकर्ताओं में आक्रोश और बढ़ गया। उन्होंने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ और लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध तेज कर दिया।
NSUI नेता हेमंत पाल ने कहा कि वे जांच में पुलिस का सहयोग कर रहे हैं। उनके अनुसार, छात्रों ने खुद पेपर लीक होने की बात मानी है। इसके बावजूद मंत्री का बयान उनकी लापरवाही को दिखाता है।
NSUI ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम बनाई जाए। साथ ही चेतावनी दी गई है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो शिक्षा मंत्री के बंगले का घेराव किया जाएगा।
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