सरगुजा जिले में महिला सशक्तिकरण के लिए लगातार नए प्रयोग किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में अब ‘छेरी बैंक’ की शुरुआत की गई है। यहां छेरी यानी बकरी के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश की जा रही है।
छेरी बैंक की संचालिका अनीता बताती हैं कि जरूरतमंद महिलाओं को 4 बकरियां दी जाती हैं। इसके लिए उनसे 3 हजार रुपये सदस्यता शुल्क लिया जाता है। इस राशि से 40 महीनों तक बकरियों की देखभाल, टीकाकरण और इलाज की जिम्मेदारी पशु सखी निभाती हैं।
इन 40 महीनों में 4 बकरियों से लगभग 32 मेमनों का जन्म होता है। इसमें से 16 मेमने बैंक को किस्त के रूप में वापस देने होते हैं, जबकि बाकी 16 मेमनों पर लाभार्थी का अधिकार होता है।
इस योजना से जुड़ी हितग्राही सुमित्रा सिंह बताती हैं कि इस व्यवस्था से उन्हें अच्छी आमदनी की उम्मीद है। एक बकरा 8 से 10 हजार रुपये तक बिकता है, जिससे करीब एक लाख रुपये से ज्यादा की कमाई संभव है।
इस योजना के तहत बेहतर नस्ल की बकरियां भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। गुमला (झारखंड) और उत्तर प्रदेश से लाई गई बकरियों को लोन के रूप में महिलाओं को दिया जा रहा है। एक महिला एक बार में 4 बकरी ले सकती है और बदले में उसे 40 महीनों में 16 मेमने लौटाने होते हैं।
जिला पंचायत सीईओ विनय अग्रवाल के अनुसार, इस योजना का मुख्य उद्देश्य लघु और सीमांत वर्ग की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।
जिला प्रशासन इस पहल को लेकर काफी उत्साहित है और इसे ग्रामीण महिलाओं के लिए एक बड़ा अवसर माना जा रहा है।
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