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छत्तीसगढ़ की सियासत में बड़ा फेरबदल तय! 90 से 120 सीटों तक बढ़ सकता आंकड़ा, जनगणना के बाद बदलेगा पूरा नक्शा..

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : छत्तीसगढ़ की राजनीति में आने वाले सालों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन से प्रदेश का पूरा राजनीतिक नक्शा बदलने की तैयारी में है।

मौजूदा समय में 90 सीटों वाली विधानसभा का आंकड़ा बढ़कर करीब 120 तक पहुंच सकता है। इसके साथ ही प्रदेश की 11 लोकसभा सीटों में भी इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है।

Chhattisgarh political map change after census


मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस बदलाव का असर केवल सीटों की संख्या तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई सालों से बने राजनीतिक और जातिगत समीकरण भी पूरी तरह बदल सकते हैं।

प्रशासन ने 2027 की जनगणना को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल तरीके से होगी, जिसमें मोबाइल एप के जरिए डेटा जुटाया जाएगा। लोगों को खुद भी अपनी जानकारी ऑनलाइन भरने का विकल्प मिलेगा।

जनगणना दो चरणों में पूरी होगी। पहले चरण में भवनों की गिनती और उनके उपयोग की जानकारी ली जाएगी, वहीं दूसरे चरण में लोगों की विस्तृत जनसंख्या गणना की जाएगी। रायपुर समेत कई इलाकों में मकानों की नंबरिंग भी शुरू हो चुकी है।

राज्य गठन के बाद से 2003 से विधानसभा सीटों की संख्या 90 ही बनी हुई है। लेकिन 2026 के बाद पहली जनगणना के आधार पर नया परिसीमन किया जाएगा, जिससे करीब 30 नई सीटें जुड़ सकती हैं।

महिला आरक्षण लागू होने की स्थिति में करीब 40 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं। वहीं केंद्र सरकार 2025 में परिसीमन आयोग का गठन कर सकती है।

इस पूरे बदलाव का सबसे ज्यादा असर बस्तर संभाग में देखने को मिल सकता है। यहां नई सीटों के जुड़ने और सीमाओं के बदलने से क्षेत्रीय संतुलन भी बदल सकता है।

छत्तीसगढ़ का राजनीतिक इतिहास भी लगातार परिसीमन के साथ बदलता रहा है। अब तक छह बार परिसीमन हो चुका है और यह सातवां मौका होगा, जब प्रदेश का सियासी ढांचा नए सिरे से तैयार होगा।

आरक्षित सीटों के आंकड़े भी बदल सकते हैं। वर्तमान में 29 सीटें एसटी और 10 सीटें एससी के लिए आरक्षित हैं, लेकिन नई जनसंख्या के आधार पर इसमें बदलाव संभव है।

परिसीमन का मतलब चुनावी क्षेत्रों की सीमाएं तय करना होता है, जो आमतौर पर जनगणना के बाद किया जाता है। इस बार का परिसीमन केवल प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रदेश की सत्ता की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।

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