मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पहाड़ी पर मौजूद सूखी घास और झाड़ियों ने आ.ग को और भड़काने का काम किया। तेज हवा के चलते लपटें तेजी से फैलती गईं और ऊंचाई की ओर बढ़ती रहीं, जिससे आ.ग पर काबू पाना लगातार मुश्किल होता गया।
चौंकाने वाली बात यह रही कि सूचना मिलने के बाद भी खबर लिखे जाने तक न तो दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंची थीं और न ही प्रशासनिक टीम सक्रिय दिखाई दी। इससे लोगों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है।
बुढ़ादेव पहाड़ी सिर्फ एक प्राकृतिक स्थल ही नहीं, बल्कि लोगों की आस्था से भी जुड़ी हुई है। ऐसे में इस आ.ग से पर्यावरण को बड़ा नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। साथ ही यहां के वन्य जीव और जैव विविधता भी खतरे में पड़ गई है।
जानकारी के मुताबिक, नगरपालिका की दमकल टीम पहाड़ी तक नहीं पहुंच पा रही है, जिससे आ.ग लगातार फैलती जा रही है और हालात गंभीर बने हुए हैं।
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