ग्रामीणों का कहना है कि भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत यहां जो पुल और अंडरपास बनाए जा रहे हैं, उनकी ऊंचाई काफी कम रखी गई है। ऐसे में फसल से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली, हार्वेस्टर और गांव में बनने वाली बड़ी मूर्तियां इस रास्ते से नहीं निकल पाएंगी। किसानों के अनुसार इस इलाके में धान खरीदी केंद्र भी है, इसलिए बड़े वाहनों का आना-जाना जरूरी रहता है।
ग्रामीणों ने शिवनाथ नदी पर बन रहे पुल को लेकर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि पुल की मौजूदा लंबाई करीब 120 मीटर रखी गई है, जबकि इस इलाके में लगभग 600 मीटर तक का क्षेत्र हर साल बाढ़ के पानी में डूब जाता है। ऐसे में पुल की लंबाई कम से कम 500 मीटर तक बढ़ाने की मांग की जा रही है, ताकि बारिश के समय पानी आसानी से निकल सके और गांव व खेतों में पानी न भरे।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर पुल की लंबाई नहीं बढ़ाई गई तो बारिश के मौसम में बाढ़ का पानी गांव और खेतों तक पहुंच सकता है। इससे किसानों की फसल को हर साल नुकसान होने की आशंका है। ग्रामीणों के अनुसार लगभग 2500 हेक्टेयर से ज्यादा कृषि भूमि इस समस्या से प्रभावित हो सकती है। इस परियोजना से घनौद, बिरेसर, चंगोरी और अंजोरा (ख) गांव के किसान और ग्रामीण प्रभावित हो रहे हैं।
ग्रामीण अनिल देवांगन ने बताया कि इससे पहले 17 जुलाई 2025 को भी इन्हीं मांगों को लेकर ग्रामीणों ने काम रोको आंदोलन किया था। उस समय प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे थे और छह महीने के भीतर समस्या का समाधान करने का भरोसा दिया था। ग्रामीणों ने उस भरोसे पर आंदोलन वापस ले लिया था, लेकिन अब आठ महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है।
इसी वजह से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है और उन्होंने फिर से आंदोलन का रास्ता चुना। इसी नाराजगी के चलते अंजोरा गांव में चक्का जाम किया गया।
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