दूल्हे ने खुद बताया कि उसने पहले फुलबती को प्रपोज किया था, लेकिन उसने मना कर दिया था। वहीं यामिनी ने तुरंत हां कर दी। बाद में परिस्थितियां ऐसी बनीं कि दोनों ही शादी के लिए राजी हो गईं और एक ही मंडप में विवाह संपन्न हुआ।
शादी पूरी तरह परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ हुई। 23 मार्च 2026 को मंडपाच्छादन और हल्दी की रस्में निभाई गईं, जबकि 24 मार्च को पाणिग्रहण, लग्न और आशीर्वाद समारोह आयोजित किए गए। सभी रस्में खुले तौर पर गाजे-बाजे के साथ संपन्न हुईं।
ग्रामीणों के अनुसार, यह विवाह तीनों परिवारों की सहमति और समाज के बुजुर्गों के आशीर्वाद से किया गया, ताकि आगे किसी तरह का विवाद न हो।
कानूनी पक्ष की बात करें तो अधिवक्ता के अनुसार सामान्य तौर पर एक व्यक्ति एक ही विवाह कर सकता है, लेकिन आदिवासी समाज में कई बार एक से अधिक विवाह की परंपरा भी देखने को मिलती है।
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