यह मामला दुर्ग जिले के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का है। पीड़िता की पहचान शबाना निशा उर्फ रानी (37) के रूप में हुई है, जो पचरीपारा इलाके में किराए के मकान में रहती थी। गुरुवार को डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के आदेश पर पुलिस और कोर्ट स्टाफ मकान खाली कराने पहुंचे थे।
मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार परिजनों के अनुसार, शबाना चाहती थी कि जिस मकान में वह रह रही है, उसे जमीन मालिक बेच दे, ताकि वह वहीं रह सके। लेकिन मकान मालिक इसके लिए तैयार नहीं था। इसी विवाद के चलते मामला कोर्ट तक पहुंचा, जहां फैसला शबाना के पक्ष में नहीं आया।
कोर्ट के आदेश के बाद गुरुवार दोपहर करीब 2:30 बजे पुलिस और कोर्ट स्टाफ कब्जा दिलाने के लिए मौके पर पहुंचे। बातचीत के दौरान ही शबाना अचानक घर के अंदर गई और सुसाइड की नीयत से खुद पर मिट्टी तेल डालकर आग लगा ली।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग लगते ही शबाना जलती हुई घर से बाहर निकली। यह दृश्य देखकर पुलिस और कोर्ट स्टाफ पीछे हट गया। आसपास मौजूद लोगों ने चादर की मदद से किसी तरह आग बुझाई, लेकिन तब तक वह करीब 95 प्रतिशत तक झुलस चुकी थी।
घटना के बाद उसे तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक इलाज के बाद डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए रायपुर के डीकेएस अस्पताल रेफर कर दिया, जहां उसका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार उसकी हालत बेहद गंभीर बनी हुई है।
बताया जा रहा है कि शबाना निशा का राजनीतिक जीवन भी रहा है। वह पिछले दुर्ग नगर निगम चुनाव में वार्ड क्रमांक 28 पचरीपारा से कांग्रेस के टिकट पर पार्षद पद का चुनाव लड़ चुकी है।
पीड़िता के मामा लियाकत अली ने बताया कि शबाना पिछले 40 से 45 वर्षों से उसी मकान में किराए पर रह रही थी। बीते 4-5 महीनों से उस पर मकान खाली करने का दबाव बनाया जा रहा था। गुरुवार को जब टीम पहुंची, तभी यह दर्दनाक घटना हो गई।
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