सरकार ने साफ किया है कि अगर कोई नेशनल एक्सप्रेसवे शुरुआत से अंत तक पूरी तरह चालू नहीं है, तो यात्रियों से पूरे रूट का टोल नहीं वसूला जाएगा। अब केवल उसी हिस्से के हिसाब से शुल्क लिया जाएगा, जो वास्तव में चालू है।
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इतना ही नहीं, उस चालू हिस्से पर टोल दरें एक्सप्रेसवे की बजाय सामान्य नेशनल हाईवे के हिसाब से तय होंगी। आमतौर पर नेशनल हाईवे की दरें कम होती हैं, जिससे यात्रियों की जेब पर कम बोझ पड़ेगा।
अब तक कई जगहों पर आंशिक रूप से तैयार एक्सप्रेसवे पर भी पूरी दर से टोल लिया जाता था। इस कारण यात्रियों में नाराजगी देखी जाती थी। नए नियम के जरिए इस असमानता को खत्म करने की कोशिश की गई है।
सरकार का मानना है कि कम टोल दरों से ज्यादा लोग एक्सप्रेसवे के चालू हिस्सों का इस्तेमाल करेंगे। इससे पुराने नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और आवाजाही ज्यादा सुगम बनेगी।
ट्रकों और मालवाहक वाहनों को भी राहत मिलेगी। लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और सामान की डिलीवरी समय पर हो सकेगी। यात्रियों का समय बचेगा और ईंधन की खपत भी कम होने की उम्मीद है।
सरकार को उम्मीद है कि इससे जाम की समस्या में कमी आएगी। जब वाहन कम भीड़ वाले एक्सप्रेसवे की ओर शिफ्ट होंगे, तो पुराने हाईवे पर रुक-रुक कर चलने की स्थिति सुधरेगी और प्रदूषण में भी गिरावट आ सकती है।
यह संशोधन 15 फरवरी 2026 से देशभर में लागू होगा, जहां-जहां एक्सप्रेसवे आंशिक रूप से चालू हैं। सरकार का कहना है कि यह कदम यात्रा को ज्यादा किफायती और सुविधाजनक बनाने की दिशा में उठाया गया है।
अगर आप भी एक्सप्रेसवे से सफर करते हैं, तो यह अपडेट आपके लिए बेहद जरूरी है। ऐसे ही काम की खबरों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।
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