भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है, जिसे पूरी तरह खत्म तो नहीं किया जा सकता, लेकिन समझदारी से कंट्रोल जरूर किया जा सकता है। अब तक लोगों को यही बताया जाता रहा कि शुगर कंट्रोल के लिए सख्त डाइट, मीठा बंद और कड़ी पाबंदियां जरूरी हैं। लेकिन अब हेल्थ एक्सपर्ट्स की राय इससे कुछ अलग है।
डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए समय पर दवाएं लेना, खानपान में बदलाव, कार्ब्स यानी मीठी और स्टार्च वाली चीजों से परहेज और शरीर को एक्टिव रखना बेहद जरूरी माना जाता है। आसान शब्दों में कहें तो शुगर लेवल काबू में रखने के लिए लोग खुद को सख्त नियमों में बांध लेते हैं।
Weill Cornell Medical College की एक रिसर्च के अनुसार, अगर कोई डायबिटीज मरीज अपने खाने की शुरुआत रोटी, चावल या आलू जैसे कार्बोहाइड्रेट से करता है, तो शरीर में ग्लूकोज का स्तर तेजी से बढ़ता है। खाली पेट कार्ब्स खाने पर शरीर उन्हें तुरंत शुगर में बदल देता है, जिससे इंसुलिन पर असर पड़ता है।
हालांकि अब मेडिकल साइंस सख्त नियमों की जगह स्मार्ट आदतों पर जोर दे रही है। ताजा रिसर्च बताती है कि डायबिटीज कंट्रोल में यह ज्यादा मायने रखता है कि आप खाना किस क्रम में और कैसे खाते हैं, न कि सिर्फ क्या खाते हैं।
सर्टिफाइड डायबिटीज एजुकेटर कनिका मल्होत्रा के अनुसार, डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए भूखा रहना या पसंदीदा खाने को पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं है। बस रोजमर्रा की दिनचर्या में 5 छोटे लेकिन असरदार बदलाव अपनाने की जरूरत है।
कनिका मल्होत्रा बताती हैं कि खाने की शुरुआत सब्जियों और प्रोटीन से करनी चाहिए। जब पहले फाइबर और प्रोटीन लिया जाता है, तो कार्बोहाइड्रेट धीरे पचते हैं। इससे ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता और इंसुलिन पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता। यह तरीका खासकर उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जिनका शुगर लेवल खाने के बाद तेजी से बढ़ता है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, शरीर का मेटाबॉलिज्म दिन में ज्यादा एक्टिव रहता है। ऐसे में रात का खाना हल्का रखने से ब्लड शुगर कंट्रोल में मदद मिलती है। देर रात भारी भोजन करने से शुगर बढ़ने और वजन बढ़ने का खतरा रहता है। हल्का डिनर पाचन को बेहतर बनाता है और नींद की गुणवत्ता भी सुधारता है।
डायबिटीज मैनेजमेंट में तेल का चुनाव भी अहम है। कनिका मल्होत्रा के अनुसार, बार-बार गर्म किया गया और रिफाइंड तेल इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ा सकता है। इससे सूजन बढ़ती है और शुगर कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है। इसलिए तेल की मात्रा और गुणवत्ता दोनों पर ध्यान देना जरूरी है।
एक्सपर्ट्स यह भी कहते हैं कि ब्लड शुगर की सिर्फ एक रीडिंग देखकर घबराना सही नहीं है। शुगर कंट्रोल को समझने के लिए उसके ट्रेंड और पैटर्न पर नजर रखना जरूरी होता है। इससे यह पता चलता है कि कौन-सी आदत या भोजन शुगर को प्रभावित कर रहा है।
कनिका मल्होत्रा का कहना है कि दवाएं डायबिटीज कंट्रोल में मदद जरूर करती हैं, लेकिन असली फर्क रोजमर्रा की आदतें डालती हैं। सही समय पर खाना, संतुलित डाइट, फिजिकल एक्टिविटी और अच्छी नींद शुगर कंट्रोल की मजबूत नींव बनती हैं। केवल दवाओं पर निर्भर रहना लंबे समय में पर्याप्त नहीं होता।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि डायबिटीज मैनेजमेंट डर और सख्ती का नहीं, बल्कि समझदारी का खेल है। खाने की सही शुरुआत, हल्का डिनर, सही तेल, शुगर ट्रेंड पर नजर और हेल्दी आदतें मिलकर ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से कंट्रोल कर सकती हैं।
डिस्क्लेमर- यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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