कुलथी दाल कोई नई खोज नहीं है। अमेरिका की नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज ने इसे भविष्य के लिए एक पोटेंशियल फूड माना है। यह हजारों साल पुरानी दाल है, जो भले ही उड़द, अरहर या मूंग जितनी लोकप्रिय न हो, लेकिन पोषण के मामले में उनसे किसी तरह कम नहीं मानी जाती। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे कुलथी, हुराली या मद्रास ग्राम के नाम से जाना जाता है।
यह दाल प्रोटीन और एनर्जी का बेहतरीन स्रोत मानी जाती है। पुराने समय में इसे रेस में दौड़ने वाले घोड़ों को खिलाया जाता था, ताकि वे ताकतवर और फुर्तीले बने रहें। इसी वजह से इसे “हॉर्स ग्राम” यानी घोड़ों का चना भी कहा जाता है।
कुलथी दाल को हॉर्स ग्राम के नाम से भी जाना जाता है। यह दक्षिण-पूर्व एशिया में पाई जाने वाली दाल है, जहां की जलवायु इसे उगाने के लिए अनुकूल मानी जाती है। इसकी सूखी और सख्त बनावट के साथ इसका खास स्वाद और खुशबू इसे अलग पहचान देती है। यही कारण है कि यह कई पारंपरिक व्यंजनों का अहम हिस्सा रही है। इसे दुनिया की सबसे ज्यादा प्रोटीन-रिच दालों में गिना जाता है।
भारत के कई हिस्सों में कुलथी दाल की खेती होती है, खासकर पहाड़ी और सूखे इलाकों में। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में यह पारंपरिक भोजन का हिस्सा है। इसके अलावा महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी इसकी खेती की जाती है। इसे उगाने के लिए ज्यादा खाद और पानी की जरूरत नहीं होती, इसलिए ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में यह लंबे समय से खाने में शामिल रही है।
पोषण की बात करें तो कुलथी दाल प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और फाइबर से भरपूर होती है। इसमें आयरन, कैल्शियम और फॉस्फोरस जैसे जरूरी मिनरल्स अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। साथ ही इसमें B-कॉम्प्लेक्स विटामिन्स भी मौजूद होते हैं, जो शरीर के एनर्जी मेटाबॉलिज्म के लिए जरूरी माने जाते हैं।
सेहत के लिहाज से कुलथी दाल को काफी खास माना गया है। इसमें मौजूद प्रोटीन, फाइबर और मिनरल्स शरीर को ताकत देने के साथ-साथ बेहतर पाचन और एनर्जी लेवल बनाए रखने में मदद करते हैं। नियमित सेवन से मसल्स की मजबूती में भी सहायक मानी जाती है, इसी वजह से इसे बैलेंस्ड डाइट का अहम हिस्सा कहा जाता है।
सामान्य तौर पर एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति के लिए रोज 25 से 30 ग्राम कुलथी दाल पर्याप्त मानी जाती है, जो पकने के बाद लगभग एक छोटी कटोरी के बराबर होती है। हालांकि जिन लोगों को किडनी स्टोन या एसिडिटी की समस्या है, उन्हें इसकी मात्रा और सेवन की फ्रीक्वेंसी डॉक्टर या न्यूट्रिशन एक्सपर्ट से पूछकर तय करनी चाहिए।
आयुर्वेद में भी कुलथी दाल को एक शक्तिशाली औषधि के रूप में देखा गया है। हालांकि इसकी तासीर गर्म मानी जाती है, इसलिए कुछ मेडिकल कंडीशन में इसका सेवन नुकसानदायक हो सकता है।
कुलथी दाल को डाइट में शामिल करने के कई तरीके हैं। इसे धोकर रातभर भिगोने के बाद प्रेशर कुकर में पकाकर सादा दाल, सूप या रसम की तरह खाया जा सकता है। इससे यह आसानी से पच जाती है। इसे अंकुरित करके सब्जी या सलाद में भी डाला जा सकता है। कुछ जगहों पर इसका काढ़ा पीने की परंपरा भी है। इसका आटा बनाकर रोटी या चीला तैयार किया जाता है, वहीं चावल के साथ खिचड़ी के रूप में भी यह पौष्टिक विकल्प माना जाता है। बेहतर स्वाद और पोषण के लिए इसमें जीरा, लहसुन, हींग और हल्के मसालों का तड़का लगाया जाता है।
ये लोग कुलथी दाल न खाएं
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गर्भवती महिलाएं
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जिन्हें यूरिक एसिड की समस्या है
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जिन्हें गाउट (Gout) है
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जिनका वजन बहुत कम है
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जिन्हें पित्त दोष है
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जिन्हें एसिडिटी और अल्सर की समस्या रहती है
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जो एनीमिया की दवाइयां लेते हैं
नोट: गाउट एक तरह का अर्थराइटिस होता है।
इन बीमारियों में कुलथी दाल फायदेमंद
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मोटापा
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किडनी स्टोन
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डायबिटीज
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अस्थमा
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खांसी
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जुकाम
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हार्ट डिजीज
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ब्रोंकाइटिस
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कब्ज
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अनियमित पीरियड्स
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कुलथी दाल के हेल्थ बेनिफिट्स
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हीलिंग में मददगार होती है
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मसल्स को मजबूत करती है
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कब्ज कम करने में सहायक
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एनीमिया का रिस्क कम करती है
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पाचन बेहतर बनाती है
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ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद करती है
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टॉक्सिन्स साफ करने में सहायक
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एनर्जी लेवल बनाए रखती है
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मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करती है
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वजन कंट्रोल में मददगार
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हार्ट हेल्थ बेहतर बनाती है
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इम्युनिटी मजबूत करती है
कुलथी दाल से मिलने वाला न्यूट्रिशन (100 ग्राम कच्ची दाल में)
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ऊर्जा (Energy): 321 kcal
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प्रोटीन: 22 ग्राम
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कार्बोहाइड्रेट: 57 ग्राम
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फैट: 0.5 ग्राम
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फाइबर: 5.3 ग्राम
जरूरी मिनरल्स और उनकी मात्रा
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आयरन (Fe): डेली जरूरत का 35–39%
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कैल्शियम (Ca): डेली जरूरत का 22%
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फॉस्फोरस (P): डेली जरूरत का 25%
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पोटैशियम (K): डेली जरूरत का 10–15%
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