बैठक के पहले सत्र में इंटेलिजेंस इनपुट्स की गहन समीक्षा की जा रही है, जबकि दूसरे सत्र में नक्सल प्रभावित इलाकों की मौजूदा स्थिति पर चर्चा होनी है। इस बैठक को सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस हाईलेवल बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, डिप्टी सीएम विजय शर्मा, कई राज्यों के डीजीपी, एसीएस गृह, CRPF समेत सैन्य और सुरक्षा एजेंसियों के शीर्ष अधिकारी मौजूद हैं। छत्तीसगढ़ में नक्सली खात्मे की तय डेडलाइन को अब सिर्फ 51 दिन ही बचे हैं, ऐसे में यह बैठक निर्णायक मानी जा रही है।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पहले ही 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे की समयसीमा तय की थी। इसके बाद से ही छत्तीसगढ़ और अन्य नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बल लगातार अभियान चला रहे हैं। अब डेडलाइन नजदीक होने से रणनीति पर अंतिम मंथन किया जा रहा है।
अपने दौरे के दौरान अमित शाह बस्तर में आयोजित पंडुम महोत्सव के समापन कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। इससे पहले वे 28 से 30 नवंबर तक नवा रायपुर स्थित IIM परिसर में आयोजित 60वें DGP-IGP सम्मेलन में भी भाग ले चुके हैं।
अमित शाह के दौरे को लेकर राज्य प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पहले से सतर्क हैं। रायपुर में हो रही इस बैठक में केंद्रीय अर्धसैनिक बल, राज्य पुलिस और इंटेलिजेंस एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए हैं। माना जा रहा है कि बैठक के बाद नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अभियानों की रफ्तार और तेज हो सकती है।
कुल मिलाकर अमित शाह का यह दौरा सिर्फ एक नियमित समीक्षा नहीं, बल्कि तय समयसीमा से पहले नक्सलवाद के खिलाफ आखिरी बड़ी रणनीतिक बैठक के तौर पर देखा जा रहा है, जिसका असर आने वाले दिनों में जमीनी हालात पर साफ नजर आ सकता है।
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